छत्तीसगढ़

राम सप्ताह के चौथे दिन भक्तिमय हुआ खरसिया, अंचल के बच्चों ने किया हनुमान चालीसा का जाप एवं भजनों की प्रस्तुति

 

जोहार छत्तीसगढ़-खरसिया।
नगर में आयोजित राम सप्ताह के चौथे दिन मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। सियाराम सखा मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा शामिल हुए। बच्चों ने श्री हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया, भजनों में प्रस्तुतियां दीं और सीता-सीता, राम-राम का जाप करते हुए मंदिर की फेरी लगाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह शामिल हुए। आयोजन समिति एवं बच्चों द्वारा उनका स्वागत किया गया स्वागत के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने कहा कि वे ऐसे माता-पिता को नमन करते हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को सनातन धर्म और संस्कृति से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यहां आकर बच्चों और युवाओं की भक्ति देखकर उन्हें अलग तरह का अनुभव हो रहा है। उन्होंने सियाराम सखा मंडल से जुड़े युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी संस्कृति और सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन में कैप्टन स्मिथ का उदाहरण देते हुए हनुमान चालीसा की आस्था और शक्ति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा की हनुमान चालीसा से जुड़ी आस्था और उसके प्रभाव का उदाहरण लोगों के सामने है।

राम सप्ताह के दौरान बच्चों की सहभागिता आयोजन का विशेष आकर्षण रही। सैकड़ों बच्चों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई। आगामी 8 अक्टूबर को राम सप्ताह का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चे भगवान के विभिन्न स्वरूपों में मनमोहक झांकियां प्रस्तुत करेंगे। आयोजन में शामिल सभी बच्चों को समान रूप से पुरस्कार दिया जाएगा तथा प्रथम-द्वितीय का कोई वर्गीकरण नहीं रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस की तैनाती रही। स्ष्ठह्रक्क सतिश भार्गव और चौकी प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी के नेतृत्व में खरसिया पुलिस की टीम ने आयोजन स्थल एवं आसपास सुरक्षा व्यवस्था संभाली। बड़ी संख्या में बच्चों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस टीम सक्रिय रही। मंदिर परिसर के आसपास बच्चों और परिवारों के लिए झूले, खाने-पीने तथा अन्य सामान की दुकानें भी लगाई गई थीं, जिससे आयोजन स्थल पर धार्मिक कार्यक्रम के साथ मेले जैसा माहौल नजर आया।

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