जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ पत्थलगांव सड़क का हाल इतना खराब हो गया है कि गाड़ी तो क्या पैदल भी चलने योग्य नहीं है। धरमजयगढ़ पत्थलगांव सड़क आज से नहीं कई सालों से खराब है लेकिन जनप्रतिनिधियों को खस्ता हाल सड़क को लेकर कोई गंभीर नहीं है। विपक्ष में बैंठे विधायक लालजीत राठिया भी सड़क को लेकर सड़क पर नहीं उतर रहे हैं। विधायक जी अपने चेला चपाटी को लेकर दिल्ली आंदोलन करने तो पहुंच सकते हैं। लेकिन अपने ही विधान सभा की अव्यवस्था को लेकर आंदोलन नहीं कर रहे हैं। इससे तो ऐसा लगता है कि विधानसभा के जनता से विधायक राठिया को कोई सारोकर है ही नहीं। वैसे भी विधायक राठिया पूर्व में भी अपने विधानसभा का विकास छोड़ पड़ोसी विधानसभा का विकास करने के लिए मुख्यमंत्री सामग्र योजना की राशि दे चूंके हैं ऐसे विधायक पर जनता क्या विश्वास कर सकते हैं। सिसरिंगा मंदिर से सड़क का हाल ऐसा है कि देखने से नहीं लगता है कि कोई सड़क है, इतना बड़ा -बड़ा गड्ढा हो गया है। इस सड़क से तो छोटी चार चक्का आप चला ही नहीं सकते। सड़क का हाल तो लोगों को दिखता है लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को खस्ता हाल सड़क क्यों नहीं दिखता।
विधायक राठिया कब बैंठेंगे सड़क के लिए सड़क पर
क्षेत्र की जनता जानना चाहते हैं कि सड़क का खस्ताहाल कब तक ठीक हो पायेगा और विधायक राठिया जनता को जवाब दे कि क्या विधानसभा वासियों के उनका मुलभूत सुविधा उपलब्ध करवाना विधायक का जिम्मेदारी नहीं है। अगर है तो विधायक बतायें कि सड़क की समस्या को लेकर सड़क पर कब बैंठेंगे?
कब तक धरमजयगढ़ की भोली-भाली जनता बेवकूफ बनते रहेंगे?
जैसे ही चुनाव आते हैं वैसे ही नेता जी अपना हाजरी देना शुरू कर देते हैं गांव-गांव और बोलते फिरेंगे की हमारी सरकार नहीं है इसलिए मैं कुछ नहीं कर पाया हूं। वोट देकर हमारी सरकार बनाये फिर देखो विकास क्या होता है। आप लोगों को चकाचक सड़क मिल जायेगा, किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगा उसके लिए मैं आप लोगों के साथ खड़ा हूं। लेकिन नेता जी और विधानसभा के जनता ये भूल जायेंगे कि इससे पहले नेता जी की ही सरकार थी राज्य में इसके बाद भी सड़क में कोई सुधार नहीं हुआ है और विपक्ष में होने के बाद भी सड़क को लेकर कोई हल्ला नहीं बोल रहे हैं इससे आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे द्वारा चूना गया जनप्रतिनिधि जनता के लिए कितना काम कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी हमारे विधानसभा के भोले-भाले जनता इनके चुपड़ी-चापड़ी बातों में आकर एक बार फिर वोट देकर विधानसभा भेज देंगे। जनता को भी समझना होगा कि पार्टी कोई भी रहे उससे कोई मतलब नहीं, होना तो ये चाहिए कि जो क्षेत्र का विकास करेगा उसको वोट देकर विधानसभा भेजना चाहिए, और निकम्मे जनप्रतिनिधियों को उसकी औकात बता देना चाहिए कि जनता के साथ छल करने का अंजाम क्या होता है।








