छत्तीसगढ़

स्कूली छात्राओं को घटिया सायकल वितरण का विरोध करने पर जेल क्यों?… क्या भाजपा सरकार का विरोध करने पर पुलिस विरोधकर्ता को जेल भेजेंगे?

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

छत्तीसगढ़ सरकार सरस्वती सायकल योजना के तहत स्कूली छात्राओं को सायकल वितरण किया जाता है। सायकल वितरण छात्राओं को इसलिए किया जाता है कि बच्चे स्कूल आसानी से आ जा सकें। लेकिन विडंबना है कि सरकार द्वारा वितरण किया गया सायकल कोई काम का नहीं होता है, प्रशासन सायकल वितरण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिओं को बुलाकर उनके हाथों से स्कूली छात्राओं को सायकल वितरण करवायाजाता है। अब समझ में ये नहीं आता कि जनप्रतिनिधि कौन सा चश्मा पहन कर जाता है सायकल वितरण करने की उनको सायकल का वस्ताविक स्थिति दिखाई नहीं देता। क्योंकि इनके ही हाथों वितरण हुए सायकल को स्कूली बच्चें चलाकर नहीं ले जा सकते ये हाल होता सरकार द्वारा बाटा गया सायकल का। सायकल वितरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के सामने ही सायकल को स्कली बच्चें उठाकर ले जाते हैं लेकिन इन जनप्रतिनिधिओं को सायकल की स्थिति देखकर शर्म भी नहीं आता है? सरकार द्वारा वितरण किए गये सायकल का हाल तो ऐसा होता है कि सायकल के टायर में हवा तक नहीं होता है, सायकल देखते ही आप समझ जायेंगे की सायकल कितना घटिया किस्म का है ये आपको दिखेगा लेकिन शासन-प्रशासन को नहीं। मजेदार बात तो ये है कि सायकल वितरण करने जाने वाले हमारे जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में समोसा खाकर घटिया सायकल वितरण कर देते हैं? होना तो ये चाहिए कि सायकल वितरण करते वक्त सायकल की स्थिति का जायजा लेकर घटिया सायकल सप्लाई करने वाले दुकानदार पर नकेल कसते हुए जांच टीम बनाकर दुकानदार पर पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करवाना चाहिए। लेकिन हमारे रायगढ़ जिले में ऐसा नहीं होता है यहां घटिया सायकल वितरण करने का विरोध करने पर जेला भेज दिया जाता है।

हर साल किया जात है करोड़ों रूपये का सायकल वितरण

हर साल सरकार करोड़ों रूपये का सायकल वितरण करते हैं, ताकि हमारे छत्तीसगढ़ की बेटियों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो लेकिन सरकार में बैंठे कुछ दलालनुमा लोगों को चलते सरकार का महत्वाकंक्षी सरस्वती सायकल योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ जाता है। स्कूली छात्राओं को वितरण करने वाली सायकल बहुत ही घटिया किस्म का होता है। सायकल सप्लायर को टेंडर लेते समय कोई भी एक कंपनी का सायकल वितरण करने का अनुबंध होता है लेकिन सायकल वितरण करते वक्त सायकल का कल पुरजा अलग-अलग कंपनी का होता है जो नियम विरूद्ध है। शिक्षा विभाग को सायकल वितरण करने से पहले सायकल को पूरी तरह जांच परक के बाद ही वितरण करवाना चाहिए ताकि सरकार का किरकिरी न हो। वर्तमान में लैलूंगा विकास खण्ड में सायकल वितरण को लेकर उपजे विवाद से विष्णु सरकार की छवि खराब हुआ है।

घटिया सायकल विरतरण का विरोध करने पर रवि भगत को भेजा जेल

लैलूंगा विकासखण्ड के कुपाकानी में सरस्वती सायकल योजना के तहत छात्राओं को घटिया सायकल वितरण का आरोप लगाते हुए पूर्व भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने सायकल वितरण का विरोध करते हुए, सायकल वितरण कार्यक्रम बाधा डाला, स्थानीय प्रशासन ने रवि भगत को समझाने की कोशिश किया लेकिन रवि भगत ने प्रशासन से सायकल का बिल रसीद की मांग करता रहा, लेकिन किसी ने सायकल का बिल, रसीद के बारे में कोई चर्चा नहीं किया सीधा रवि भगत को पुलिस के हवाले करते हुए जेल भेजवा दिया। अगर सायकल वितरण में किसी प्रकार की कोई गोलमाल नहीं हुआ तो शासन-प्रशासन दिखा देते बिल, रसीद और करवा देते सायकल का भौतिक सत्यापन। लेकिन शासन -प्रशासन ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि सायकल वितरण में लाखों का भ्रष्टाचार जो हुआ है?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए

* क्या साइकिलों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
* क्या खरीद प्रक्रिया और बिल-रसीद सार्वजनिक किए जाएंगे?
* यदि साइकिलें मानक के अनुरूप नहीं थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं पर क्या कार्यवाही होगी?
* और यदि विरोध केवल सवाल उठाने के कारण हुआ, तो क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दे उठाना अपराध माना जाएगा?

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखें। यदि साइकिलों की गुणवत्ता में गड़बड़ी हुई है, तो दोषियों पर कड़ी कार्यवाही हो। वहीं यदि विरोध के दौरान कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जानकारी भी तथ्यों सहित सार्वजनिक की जाए। लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनता का विश्वास कायम रखने का सबसे मजबूत आधार है।

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