जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम सिसरिंगा में भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित एक क्षतिग्रस्त मकान में परिवार के रहने से संभावित दुर्घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। सिसरिंगा निवासी नरसिंह का मकान ब्लास्टिंग के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वे अपने परिवार के साथ उसी भवन में रह रहे हैं। बरसात के मौसम को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि भारतमाला परियोजना के तहत उरगा-पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान की गई ब्लास्टिंग से मकान में गंभीर दरारें आ गई हैं। लगातार बारिश की स्थिति में भवन के ढहने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग द्वारा भारी वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार नरसिंह का सिसरिंगा गांव में एक अन्य मकान भी है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को एहतियात के तौर पर परिवार को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कराने की पहल करनी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित जनहानि से बचा जा सके।

5 लाख रुपये के मुआवजे का हुआ था अनुबंध
प्राप्त जानकारी के अनुसार डीबीएल कंपनी (दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड) और नरसिंह के बीच एक लिखित सहमति पत्र निष्पादित हुआ है। अनुबंध में मकान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का उल्लेख है। इसमें से 2.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से 8 मई 2025 को दिए जा चुके हैं, जबकि शेष 2.50 लाख रुपये का भुगतान भी आरटीजीएस के माध्यम से डीबीएल द्वारा नरसिंह के बैंक खाते में जामा कर दिया गया है। सहमति पत्र में यह भी उल्लेख है कि ब्लास्टिंग के दौरान यदि मकान को नुकसान होता है या जनहानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रथम पक्ष की होगी। वहीं मुआवजा प्राप्त होने के बाद भविष्य में होने वाली क्षति अथवा जनहानि की जिम्मेदारी प्रथम पक्ष की होगी, ऐसा भी अनुबंध में दर्ज बताया गया है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर है और लगातार बारिश के बीच उसमें रहना जोखिम भरा है। ऐसे में प्रश्न उठ रहे हैं कि जब प्रशासन को स्थिति की जानकारी है, तब भी अब तक परिवार को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने या भवन को लेकर आवश्यक कार्यवाही क्यों नहीं की गई।
फिलहाल क्षेत्र के लोग प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर संभावित दुर्घटना को टालने की मांग कर रहे हैं।








