छत्तीसगढ़

लाखों की पानी टंकी बनी शोपीस, जलडेगा के ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी को मोहताज… ग्रामीणों ने बताया कि पानी के लिए हर दिन होती है लड़ाई.. नदी का पानी पीने को मजबूर होना पड़ता ग्रामीणों को

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ विकासखण्ड का अंतिम छोर पर बसा ग्राम पंचायत क्रिन्धा का आश्रित गांव जलडेगा आज भी मूलभूत सुविधा से वंचित नजर आ रहा है, सरकारी रिकार्ड अनुसार इस मुहल्ले में 41 परिवार निवास करते हैं। 41 परिवार के लोगों को शुद्ध जल मिले इसके लिए शासन से 15 लाख 70 हजार रूपये खर्चकर के्रडा विभाग द्वारा हमर गांव हमर पेयजल योजना के तहत एक सोलर पंप पानी टंका का निर्माण किया गया है। लाखों खर्च होने के बाद भी जलडेगा वासियों को पीने के लिए शुद्ध जल ठीक से नहीं मिल रहा है। 15 लाख 70 हजार खर्च करने के बाद भी के्रडा विभाग द्वारा टंकी में पानी भरने के लिए बोर खनन नहीं किया है, गांव में पहले से लगे हेण्ड पंप में ही के्रडा विभाग द्वारा पंप लगा दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पंप लगाते समय 10 पाइप बोर में गिर गया है, जिसके कारण पंप नीचे तक नहीं जा पा रहा है। पंप उपर में होने के कारण टंकी में पानी नहीं भर पता है, गांव की महिलाएं सुबह से ही काम धंधा छोड़कर लाइन में लगे रहते है पानी के लिए बड़ी मुश्किल से एक बल्टी पंनी निकलता होगा बहुत देर तक इंतेजार करने के बाद। पानी की समस्या के बारे में सभी अधिकारी को मालूम है इसके बाद भी ग्रामीणों को कम से कम पीने के लिए पानी मिले इसके लिए कोई उपाये नहीं कर रहे हैं प्रशासन।

हर घर में नल लगा है पर पानी नहीं

शासकीय योजना के तहत हर घर में नल कनेक्शन लगा हुआ है, नल से आज तक एक बूंद भी पानी नहीं मिला ग्रामीणों को। ग्रामीणों ने बताया कि नल सिर्फ नाम के लिए लगा है, आज तक हम लोगों को ये मालूम नहीं चला की नल से पानी कैसे आता है। क्योंकि टंकी जब से बना है तब से आज तक पानी सप्लाई नहीं हुआ है। ग्रामीणों के कहे अनुसार पानी टंकी ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गया है।

नदी का पानी पीने से पड़ते हैं बीमार

ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग मजबूरी में नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव में एक भी हेण्ड पंप नहीं है, जो हेण्ड पंप था उसमें तो टंकी का पंप डालकर बंद कर दिया है। पानी के लिए रोज लड़ाई झगड़ा होता है, रोज-रोज कितना लड़ाई झगड़ा करोगे उससे अच्छा तो नदी का गंदा पानी ही पी लेते हैं। नदी का पानी पीने से कई बार लोग बीमार भी पड़ जाते हैं पर क्या करें मजबूरी है ग्रामीणों के लिए नदी का पानी पीना।

स्कूली बच्चों को नहीं मिल रहा पीना लिए शुद्ध जल

जलडेगा गांव के स्कूल के बारे में जानकारी लेने पर बताये की स्कूल में दो शिक्षक हैं दोनों स्कूल समय पर आते हैं। यहां भी समस्या एक ही है पानी का महिलाओं ने बताया कि स्कूल में महिला समूह द्वारा खाना बनाया जाता है बच्चों के लिए, लेकिन पानी की भारी समस्या होता है लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी से पानी लाना पड़ा है खाना बनाने एवं बच्चों के पीने के लिए। अब आप सोच सकते हैं कि स्थानीय प्रशासन कितना लपरवाह है जो ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों को शुद्ध जल तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts