जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
नगरीय निकायों में गलत बिलों के भुगतान पर रोक लगाने और शासन के नियमों के अनुसार बिलों की जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की नियुक्ति की गई है। धरमजयगढ़ नगर पंचायत में भी बिल एवं फाइलों की जांच के लिए सीए वदन चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन अब नगर पंचायत में सीए की कार्यप्रणाली को लेकर ठेकेदारों में नाराजगी सामने आने लगी है। ठेकेदारों का आरोप है कि सीए नियमित रूप से नगर पंचायत कार्यालय नहीं आते हैं और जब आते हैं तो महज 5 से 10 मिनट रुककर वापस चले जाते हैं। ऐसे में बिलों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।
इसी बीच शुक्रवार को एक ठेकेदार और नगर पंचायत के लेखापाल के बीच बिल भुगतान को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद का मुख्य कारण सीए द्वारा शासन के निर्धारित नियमों से अधिक राशि की कटौती किए जाने को लेकर था। ठेकेदार और नगर पंचायत के लेखापाल द्वारा मामले को लेकर सीए से कई बार फोन पर चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन ठेकेदार का आरोप है कि उनकी समस्या पर सीए द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जिसके बाद नगर पंचायत कार्यालय में ही ठेकेदार और लेखापाल के बीच काफी देर तक बहस होती रही। ठेकेदारों का कहना है कि यदि बिलों में नियमानुसार कटौती की जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शासन के नियमों से अधिक राशि काटे जाने से ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं सीए के नियमित रूप से नगर पंचायत नहीं आने से बिलों की जांच और भुगतान में देरी होने की बात भी कही जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि यदि नगर पंचायत में बिलों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए सीए की नियुक्ति की गई है, तो सीए की नियमित उपस्थिति और बिलों की जांच की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? ठेकेदारों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुसार बिलों की कटौती और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।








