जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित हो रहे मुर्गी पालन केंद्रों और व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों को लेकर अब पर्यावरणीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में कई स्थानों पर पोल्ट्री फार्म मुख्य मार्गों अथवा राज्य मार्गों के आसपास संचालित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित फार्म संचालकों ने शासन और पर्यावरणीय नियमों के तहत आवश्यक अनुमति प्राप्त की है या नहीं। सवाल यह भी है कि कितने पक्षियों की क्षमता वाले फार्म संचालित किए जा रहे हैं, उनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं, फार्मों से निकलने वाले मुर्गियों के अपशिष्ट का निपटारा किस प्रकार किया जा रहा है और दुर्गंध, मक्खियों, गंदे पानी तथा अन्य प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
5 हजार से अधिक पक्षियों पर प्रदूषण बोर्ड की सहमति जरूरी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की जनवरी 2022 की पर्यावरणीय गाइडलाइन तथा NGT के आदेश के अनुसार एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक पक्षियों का पालन करने वाले पोल्ट्री फार्मों को पर्यावरणीय नियमों के तहत संबंधित State Pollution Control Board/PCC से Consent to Establish और Consent to Operate लेना होता है। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2023 से प्रभावी की गई। इसलिए धरमजयगढ़ क्षेत्र में यदि ऐसे व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म संचालित हो रहे हैं जिनमें एक स्थान पर 5 हजार से अधिक पक्षी रखे जा रहे हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा उनके दस्तावेजों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमतियों की जांच किया जाना जरूरी है।
मुख्य सड़क और राज्य मार्ग के आसपास फार्मों पर भी सवाल
CPCB की गाइडलाइन में नए पोल्ट्री फार्मों के लिए साइटिंग क्राइटेरिया निर्धारित किए गए हैं। उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों में जनवरी 2022 की गाइडलाइन के अनुसार नए पोल्ट्री फार्मों के लिए आवासीय क्षेत्र, जलस्रोत और राजमार्गों से न्यूनतम दूरी के प्रावधानों का उल्लेख है। राज्य राजमार्ग से दूरी संबंधी प्रावधान भी गाइडलाइन में दिए गए हैं। ऐसे में धरमजयगढ़ क्षेत्र में मुख्य सड़क अथवा राज्य मार्ग के बिल्कुल आसपास संचालित किए जा रहे नए पोल्ट्री फार्मों की स्थल जांच और दूरी का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। हालांकि, किसी पुराने फार्म को केवल सड़क के पास होने के आधार पर स्वतः अवैध नहीं कहा जा सकता; उसके निर्माण की तारीख और उस समय लागू नियमों की भी जांच जरूरी है।
मुर्गियों के अपशिष्ट से पर्यावरण को खतरा
पोल्ट्री फार्मों में बड़ी संख्या में पक्षियों के कारण मुर्गियों की बीट, मृत पक्षियों, इस्तेमाल किए गए लिटर, गंदे पानी और दुर्गंध जैसी पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। CPCB की गाइडलाइन में अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसों, ठोस अपशिष्ट, मृत पक्षियों, पानी तथा मक्खी-रोडेंट नियंत्रण को लेकर पर्यावरणीय प्रबंधन की जरूरत बताई गई है। यदि इन अपशिष्टों को खुले में फेंका जाता है, नालियों या जलस्रोतों के आसपास डाला जाता है अथवा बिना उचित प्रबंधन के रखा जाता है, तो इससे आसपास के लोगों को दुर्गंध और स्वच्छता संबंधी परेशानी के साथ पर्यावरणीय नुकसान भी हो सकता है।
केवल फार्म चलाना ही पर्याप्त नहीं, नियमों का पालन भी जरूरी
धरमजयगढ़ में यदि कोई व्यक्ति व्यावसायिक स्तर पर पोल्ट्री फार्म चला रहा है तो यह भी देखा जाना चाहिए कि उसके पास स्थानीय निकाय की आवश्यक अनुमति/पंजीयन, पशुपालन विभाग से संबंधित दस्तावेज और जहां लागू हो वहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की CTE/CTO मौजूद है या नहीं।
विशेष रूप से 5 हजार से अधिक पक्षियों वाले फार्मों की सूची तैयार कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि कौन-कौन से फार्म पर्यावरणीय अनुमति के दायरे में आते हैं और उनमें से कितने फार्मों ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी की है।
विभाग करे संयुक्त जांच
धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित पोल्ट्री फार्मों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, पशुपालन विभाग, स्थानीय निकाय और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा जांच किए जाने की जरूरत है।
जांच में यह बिंदु शामिल किए जाने चाहिए
* फार्म में वास्तविक रूप से कितने पक्षी रखे जा रहे हैं?
* क्या फार्म 5,000 से अधिक पक्षियों की क्षमता का है?
* जहां लागू हो, वहां CTE और CTO लिया गया है या नहीं?
* फार्म की स्थापना कब हुई?
* क्या नए फार्म के लिए निर्धारित साइटिंग मानकों का पालन किया गया है?
* आवासीय क्षेत्र और सड़क से फार्म की वास्तविक दूरी कितनी है?
* मुर्गियों की बीट और अन्य ठोस अपशिष्ट का निपटारा कैसे किया जा रहा है?
* मृत पक्षियों के निपटारे की क्या व्यवस्था है?
* गंदे पानी और दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था है?
* आसपास के लोगों की शिकायतें हैं या नहीं?
जांच में अनियमितता मिले तो हो कार्रवाई
जरूरत इस बात की है कि मामला केवल कागजों तक सीमित न रहे। यदि जांच के दौरान किसी पोल्ट्री फार्म में अनुमति का अभाव, पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन, अपशिष्ट का गलत निपटारा या अन्य गंभीर अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, जिन फार्मों पर नियम लागू नहीं होते या जो पुराने प्रतिष्ठान हैं, उनके मामले में भी संबंधित विभाग को लागू नियमों के अनुसार स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि बिना जांच किसी संचालक को दोषी ठहराने की स्थिति न बने।
अब सवाल विभाग से—कब होगी जांच?
धरमजयगढ़ में यदि नियमों के पालन को लेकर कोई संदेह नहीं है तो प्रशासन और संबंधित विभाग क्षेत्र के सभी बड़े पोल्ट्री फार्मों की सूची सार्वजनिक कर उनकी अनुमति और पर्यावरणीय अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करें। आखिर सवाल केवल मुर्गी पालन का नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, जलस्रोतों और पर्यावरण की सुरक्षा का भी है। नियम यदि बनाए गए हैं तो उनका पालन हर व्यक्ति और हर व्यावसायिक इकाई के लिए जरूरी है। अब देखना यह है कि धरमजयगढ़ में संचालित पोल्ट्री फार्मों की वास्तविक जांच कब होती है और जांच के बाद नियमों का पालन नहीं करने वाले संचालकों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है?








