जोहार छत्तीसगढ़-रायगढ़।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर किए गए तंज पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की हार का हिसाब रखने में व्यस्त भाजपा पहले छत्तीसगढ़ की जनता से अपने शासन के ढाई साल का हिसाब दे। तिवारी ने कहा, राहुल गांधी कितने चुनाव हारे, यह गिनना भाजपा का काम हो सकता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के युवाओं को कितनी पक्की सरकारी नौकरियां मिलीं, कितने भर्ती परिणाम समय पर हुए, कितने रोजगार वास्तव में जमीन पर आए, कितने जंगल बचे और कितनी प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रही, यह पूछना जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछली कांग्रेस सरकार से ज्यादा विकास और रोजगार देने का दावा करती है तो विज्ञापनों और भाषणों के बजाय विभागवार नियुक्तियों, रिक्त पदों, वास्तविक रोजगार और खर्च का सार्वजनिक ऑडिट कराए। केवल निवेश प्रस्तावों और घोषणाओं को रोजगार बताकर युवाओं को आंकड़ों का सपना नहीं दिखाया जा सकता। पीसीसी नेता हरेराम तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार के कागजों में छत्तीसगढ़ विकास की रफ्तार से उड़ रहा है, लेकिन जमीन पर युवा नौकरी के लिए, किसान अपनी उपज के लिए और आम आदमी महंगाई तथा अव्यवस्था से राहत के लिए कतार में खड़ा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान जल-जंगल और जमीन से है। जंगलों की कटाई, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा बड़े औद्योगिक हितों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए। विकास वह नहीं जिसमें मुनाफा कुछ हाथों में जाए और पर्यावरण, विस्थापन तथा स्थानीय हितों का बोझ जनता उठाए। तिवारी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, लेकिन यदि हर योजना पारदर्शी है तो टेंडर, निर्माण कार्य, सरकारी खरीद, योजनाओं के भुगतान और परियोजनाओं का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने में सरकार को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, राहुल गांधी की हार पर तालियां बजाने से न छत्तीसगढ़ के जंगल बचेंगे, न युवाओं को रोजगार मिलेगा और न भ्रष्टाचार खत्म होगा। विपक्ष की चुनावी हार गिनने के बजाय सरकार अपनी उपलब्धियां गिने, और इस बार आंकड़े सरकारी मंच से नहीं, जनता के बीच से जुटाए। तिवारी ने कहा कि सत्ता को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि जनता चुप है तो संतुष्ट है। छत्तीसगढ़ में सवाल बढ़ रहे हैं, असंतोष बढ़ रहा है और जनता हर घोषणा, हर निर्णय तथा हर दावे का हिसाब रख रही है। चुनाव में जवाब भाषण से नहीं, जनता के वोट से मिलता है।








