जोहार छत्तीसगढ़-कबीरधाम।
कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत तरेगांव जंगल में एक गरीब मजदूर महिला की झोपड़ी और जमीन को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि महिला का दावा है कि उसे यह तक जानकारी नहीं कि उसकी झोपड़ी वाली जमीन कब और किसके द्वारा बेच दी गई।
वर्षों से मेहनत-मजदूरी कर जीवन यापन करने वाली महिला अब अपने आशियाने पर संकट की मार झेल रही है। सवाल यह उठता है कि क्या बिना जानकारी और सहमति के किसी गरीब की जमीन का सौदा संभव है? यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार कौन है? गरीब की झोपड़ी पर मंडरा रहा संकट और प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर राजस्व अभिलेखों में कब बदलाव हुआ? किसके नाम पर जमीन दर्ज हुई? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी।
़े सवाल
क्या गरीब महिला के अधिकारों की अनदेखी की गई।
जमीन के दस्तावेजों में बदलाव किस आधार पर हुआ।
संबंधित अधिकारियों ने जांच क्यों नहीं की।
क्या गरीब होने की वजह से उसकी आवाज दबाई जा रही है?
अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाती है या फिर एक गरीब महिला न्याय की आस में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होगी।








