जोहार छत्तीसगढ़ -कुसमी।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्र ग्राम पंचायत सबाग में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्ष 2017-2018 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत सीआरपीएफ कैंप के पास स्वीकृत पीडीएस गोदाम का निर्माण कार्य वर्षों बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से जहां सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं ग्रामीणों को भी इस भवन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्ष 2017-2018 में स्वीकृत हुआ निर्माण कार्य इतने वर्षों बाद भी पूरा क्यों नहीं हो सका, क्या निर्माण कार्य की नियमित निगरानी नहीं की गई या फिर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इन सवालों के बीच अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
आठ-नौ साल बाद भी अधूरा निर्माण, जिम्मेदार कौन?
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सबाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत खाद्यान्न के भंडारण के उद्देश्य से सीआरपीएफ कैंप के पास गोदाम निर्माण कार्य को वर्ष 2017-2018 में मनरेगा योजना के तहत स्वीकृति दी गई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गोदाम का निर्माण पूरा होने के बाद सरकारी राशन के भंडारण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। लेकिन विडंबना यह है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य अधूरा रहने से सरकारी योजना का अपेक्षित लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं, लंबे समय से अधूरे पड़े इस निर्माण कार्य को लेकर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी सार्वजनिक निर्माण कार्य को सरकारी योजना के तहत स्वीकृति दी जाती है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कराना संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही होती है। ऐसे में इस निर्माण कार्य के अधूरा रहने के कारणों का पता लगाना बेहद जरूरी है।
तत्कालीन सचिव ने कहा- मेरे पदभार ग्रहण करने से पहले से अधूरा है निर्माण कार्य
इस मामले में जब तत्कालीन सचिव ग्राम पंचायत सबाग हकीमुद्दीन अंसारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ग्राम पंचायत में पदभार ग्रहण किया, उससे पहले से ही पीडीएस गोदाम का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ था। उनके इस बयान के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि निर्माण कार्य किस अवधि में और किन परिस्थितियों में अधूरा रह गया। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि निर्माण कार्य की स्वीकृति से लेकर उसके अधूरा रहने तक किन-किन अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों की क्या जिम्मेदारी थी। हालांकि, निर्माण कार्य अधूरा रहने के वास्तविक कारणों का पता संबंधित दस्तावेजों, स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही चल सकेगा।
मनरेगा के तकनीकी सहायक ने फाइल देखकर जानकारी देने की कही बात
निर्माण कार्य के संबंध में जब मनरेगा के तकनीकी सहायक रामप्रताप लकड़ा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वह सोमवार को संबंधित फाइल देखकर जानकारी देंगे। तकनीकी सहायक के इस जवाब के बाद अब संबंधित फाइल की जांच से महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है, अब तक कितना काम हुआ है, कितनी राशि स्वीकृत हुई और कितनी राशि खर्च या भुगतान की गई है। इसके अलावा, निर्माण कार्य की प्रगति का आकलन करने, तकनीकी निरीक्षण और भुगतान संबंधी अभिलेखों का सत्यापन करने से यह पता लगाया जा सकता है कि कार्य अधूरा रहने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
जनपद पंचायत सीईओ ने स्थल का निरीक्षण कराने का दिया आश्वासन
मामले को लेकर जब जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुन्ना लाल धुर्वे से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वह बलरामपुर जिले जा रहे हैं और लौटने के बाद इस मामले को दिखवाएंगे। उनके इस आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराएंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हालांकि, अब देखना होगा कि यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है और वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य को पूरा कराने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
जिला पंचायत सीईओ ने जांच करने की कही बात
इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी से भी संपर्क किया गया। उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही। जिला पंचायत स्तर से जांच किए जाने की बात सामने आने के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। यदि निष्पक्ष तरीके से जांच की जाती है, तो निर्माण कार्य के अधूरे रहने के कारणों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्माण कार्य से संबंधित सभी दस्तावेजों का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से की शिकायत, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत सबाग के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शिकायत करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास करना और आम लोगों को लाभ पहुंचाना है। लेकिन जब वर्षों तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा रहता है, तो योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े होने लगते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पीडीएस गोदाम निर्माण कार्य से संबंधित स्वीकृति आदेश, तकनीकी प्राक्कलन, निर्माण की प्रगति, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, संबंधित एजेंसी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने अधूरे भवन का निर्माण तत्काल प्रभाव से शुरू कराकर उसे जल्द पूरा करने की मांग की है, ताकि सरकारी योजना का लाभ उन्हें मिल सके।
जांच के दायरे में आने चाहिए ये महत्वपूर्ण बिंदु
इस पूरे मामले में कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब जांच के माध्यम से मिलना आवश्यक है।
* वर्ष 2017-2018 में पीडीएस गोदाम निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई थी?
* निर्माण कार्य के लिए अब तक कितनी राशि खर्च की गई और कितनी राशि का भुगतान किया गया?
* निर्माण कार्य किस स्तर तक पूरा हुआ और इसे बीच में क्यों रोक दिया गया?
* निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी किन अधिकारियों और कर्मचारियों की थी?
* क्या निर्माण कार्य की प्रगति का नियमित निरीक्षण किया गया था?
* यदि निर्माण कार्य में अनियमितता या लापरवाही हुई है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
* अधूरे भवन को पूरा कराने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
इन सवालों का जवाब मिलने से न केवल सबाग के पीडीएस गोदाम निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
अब कार्रवाई का इंतजार, क्या पूरा होगा वर्षों से अधूरा भवन?
ग्राम पंचायत सबाग में वर्षों से अधूरा पड़ा पीडीएस गोदाम अब प्रशासनिक जांच और जवाबदेही का विषय बन गया है। एक ओर ग्रामीण निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों के बयानों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कितनी गंभीरता से की जाती है। यदि निर्माण कार्य की समयबद्ध जांच कराकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाती है और अधूरे भवन को जल्द पूरा कराया जाता है, तो इससे ग्रामीणों को राहत मिलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2017-2018 में स्वीकृत पीडीएस गोदाम का निर्माण इतने वर्षों बाद भी अधूरा क्यों है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है? अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।








