जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ नगर के विकास के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत की जा रही है, ताकि नगरवासियों को बेहतर सड़क, नाली, स्वच्छता, व्यवस्थित यातायात और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन सवाल यह है कि जब सरकार विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध करा रही है और नगर पंचायत टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है, तो फिर धरातल पर काम शुरू होने में देरी क्यों हो रही है? क्या नगर विकास के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर ही सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? क्या आपसी गुटबाजी और ठेकेदारों को लेकर कथित नाराजगी का खामियाजा धरमजयगढ़ की जनता को भुगतना पड़ रहा है? नगर विकास को लेकर सामने आ रही शिकायतों और कामकाज में देरी की परिस्थितियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेता विकास कार्यों को गति देने के बजाय शिकायतों के माध्यम से अड़चनें पैदा कर रहे हैं।
बस स्टैंड सौंदर्यीकरण का मामला फिर चर्चा में
बस स्टैंड की बदहाल स्थिति सुधारने के उद्देश्य से कलेक्टर द्वारा डीएमएफ मद से नगर पंचायत को लगभग एक करोड़ रुपये की राशि जारी किया गया था। इस राशि से बस स्टैंड का सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना प्रस्तावित था। उक्त कार्य का ठेका मंटू सिंह को मिला था। इसकी जानकारी विकास विरोधी नेताओं को मिलते ही विवाद की चर्चा भी सामना शुरू हो गया था। ठेकेदार को लेकर सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की कथित नाराजगी के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया और सांसद के माध्यम से राशि वापस कराए जाने की स्थिति बनी। यदि किसी विकास कार्य को केवल ठेकेदार की पसंद-नापसंद के कारण रोका गया, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकारी राशि जनता की सुविधा के लिए जारी होती है, किसी नेता की व्यक्तिगत पसंद को पूरा करने के लिए नहीं। बस स्टैंड नगर का महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन यात्रियों, व्यापारियों और आम नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
विकास विरोध नेताओं के कारण कैसे बनेगा धरमजयगढ़ में गौरव पथ?
अब आप सोच सकते हैं कि धरमजयगढ़ में एक सुंदर सा गौरव पथ का निर्माण होना है जिसका टेंटर प्रक्रिया पूरी हो चूकी है। लगभग 6 करोड़ से बनने वाली गौरव पथ का ठेका फिर एक बार सत्ता पक्ष के विकास विरोधी नेताओं को पंसद नहीं आने वाला ठेकेदार मंटू सिंह को ही मिला है। वैसे ही नेता जी अपने चंगू मंगूओं से शिकायत का दौर शूरू कर दिया कि किसी भी तरह से नगर का गौरव पथ न बने। विकास के नाम पर वोट मंगने वाले ही नगर विकास का दुश्मन बन बैंठे हैं। ऐसे विकास विरोधी नेताओं का क्लास लेना चाहिए संगठन को नहीं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भारी नुकशान का सामना करना पड़ेगा सत्ता पक्ष को?
शिकायत करना अधिकार, लेकिन विकास रोकना उचित नहीं
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नागरिक या जनप्रतिनिधि को सरकारी कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत करने का पूरा अधिकार है। भ्रष्टाचार, अनियमितता या घटिया निर्माण की आशंका हो तो शिकायत अवश्य होनी चाहिए। लेकिन शिकायत का उद्देश्य पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत या राजनीतिक विरोध के कारण विकास कार्यों को अनिश्चितकाल तक रोकना।
विकास के नाम पर राजनीति करने वालों से संगठन को पूछना चाहिए सवाल
सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि और नेता जनता के बीच विकास के वादे लेकर जाते हैं। चुनाव के समय सड़क, नाली, पेयजल, सौंदर्यीकरण और बेहतर नगरीय सुविधाओं की बात की जाती है। ऐसे में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों पर यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे विकास कार्यों को गति देने में सहयोग करें। यदि पार्टी के भीतर गुटबाजी, आपसी प्रतिस्पर्धा या ठेकेदारों को लेकर मतभेद के कारण नगर की परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं, तो संगठन को इसकी गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए। संगठनात्मक अनुशासन का अर्थ गलत कार्यों पर पर्दा डालना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जनता के हितों से समझौता न हो। किसी नेता की नाराजगी नगर की जनता की जरूरतों से बड़ी नहीं हो सकती। न ही किसी ठेकेदार को पसंद या नापसंद करना विकास कार्यों के भविष्य का आधार बनना चाहिए। ठेकेदार का चयन नियमों के अनुसार हो, काम की गुणवत्ता की निगरानी हो और गड़बड़ी मिलने पर कठोर कार्यवाही हो, यही सही व्यवस्था है।
विधानसभा चुनाव में भी पड़ सकता है असर
धरमजयगढ़ में विकास कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। जनता यह देखती है कि उसके क्षेत्र में घोषित योजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं या नहीं, सरकारी राशि का सदुपयोग हो रहा है या नहीं और जनप्रतिनिधि समस्याओं के समाधान के लिए कितने गंभीर हैं। यदि नगरवासियों को यह संदेश जाता है कि सरकार पैसा दे रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपसी खींचतान के कारण काम नहीं हो पा रहा है, तो सत्ता पक्ष को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है? धरमजयगढ़ का विकास किसी एक नेता, गुट या ठेकेदार का विषय नहीं है। यह पूरे नगर की जनता के भविष्य का सवाल है।








