छत्तीसगढ़

15वें वित्त की राशि पर गड़बड़ी,उदका पंचायत में विकास के नाम पर लाखों का खेल, जांच शुरू

जोहार छत्तीसगढ़-पंडरिया।
कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत उदका में 15वें वित्त आयोग की लगभग 10 लाख की शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उपसरपंच एवं पंचों ने सरपंच एवं पंचायत सचिव पर फर्जी बिलों के माध्यम से राशि आहरित करने तथा विकास कार्यों के नाम पर अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगाते हुए एसडीएम पंडरिया को शिकायत सौंपी है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है। मीडिया की जमीनी पड़ताल में भी कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने शिकायत में लगाए गए आरोपों को और गंभीर बना दिया है। पंचायत भवन परिसर में स्वच्छ भारत मिशन का रिक्शा वर्षों से कबाड़ की हालत में पड़ा मिला। जबकि शिकायत के अनुसार उसके मरम्मत के नाम पर राशि खर्च किए जाने का उल्लेख है। इसी प्रकार पंचायत भवन मरम्मत, सीसी रोड मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के नाम पर भुगतान किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन मौके पर कई कार्यों के स्पष्ट प्रमाण दिखाई नहीं दिए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 12 से 15 पेयजल बोरों के लिए सबमर्सिबल मोटर खरीदी गई, जबकि अधिकांश बोर बंद पड़े हैं। ऐसे मामलों का वास्तविक सत्य तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जनपद पंचायत पंडरिया द्वारा गठित जांच दल को अभिलेखों का परीक्षण, स्थल निरीक्षण तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अब पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
भ्रष्टाचार पर लगाम या फिर औपचारिक कार्रवाई


ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह मामला भी इस चर्चा को बल दे रहा है कि क्या पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ पंचायत प्रतिनिधि राजनीतिक प्रभाव या प्रभावशाली लोगों से निकटता का दावा कर जवाबदेही से बचने का प्रयास करते हैं। हालांकि, यह एक सामान्य जनचर्चा और आशंका है,अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच दल निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई होना पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो जांच रिपोर्ट सभी संदेहों को समाप्त करेगी। ेफिलहाल पूरे जिले की निगाहे जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं।

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