छत्तीसगढ़

धरमजयगढ़ फिर कोल ब्लॉक को लेकर धधकने को तैयार, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण विरोध दर्ज करवाने पहुंचे एसडीएम कार्यालय

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ ब्लॉक में कई कोल ब्लॉक आने की खबर लगते ही ग्रामीणों का विरोध शुरू हो गया है। आज से कुछ महिने पहले पुरूंगा में अडानी का कोल ब्लॉक का जन सुनवाई होना था विरोध को देखते हुए कंपनी ने जन सूनवाई स्थागित करवा दिया था। तो वहीं अब धरमजयगढ़ में केपीसीएल का कोल ब्लॉक का अधिसूचना प्रकाशित होते ही कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों में विरोध देखने को मिल रहा है। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण रैली निकाल कर नारे बाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम धरमजयगढ़ को केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री नई दिल्ली को एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर केपीसीएल को आबंटन कोल ब्लॉक निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों न अपनी ज्ञापन में बताया कि
जंगली हाथियों के संरक्षण, भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, 2022, वनाधिकार कानून तथा ग्राम सभा के सर्वसम्मत निर्णय के पालनार्थ कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रस्तावित ओपन कोल ब्लॉक को निरस्त किया जाना अति आवश्यक है। ग्राम पंचायत बायसी कॉलोनी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 के अंतर्गत अधिसूचित पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र में पेसा अधिनियम, 2022 लागू है, जिनके अनुसार ग्राम सभा को भूमि, जल, वन, प्राकृतिक संसाधनों तथा खनन गतिविधियों से संबंधित विषयों पर निर्णय लेने का संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकार प्राप्त है। ग्रामीणों को 7 जून 2026 को समाचार पत्र हरिभूमि में प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि भारत सरकार, कोयला मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड हेतु विभिन्न मदों की कुल 1610.75 हेक्टेयर भूमि को कोयला खदान परियोजना के लिए प्रस्तावित किया गया है। संवैधानिक अधिकार के तहत ग्राम पंचायत बायसी कॉलोनी में 22 नवंबर 2025 को विधिवत आयोजित ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रस्तावित कोल ब्लॉक का विरोध एवं निरस्तीकरण किया गया था। प्रस्तावित कोल ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल 1610.75 हेक्टेयर है, क्षेत्रों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र में लगभग 365.056 और लगभग 290 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है, जो जंगली हाथियों का महत्वपूर्ण आवास एवं विचरण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में हाथियों का निरंतर आवागमन होता है तथा वन कटाई की स्थिति में मानव-हाथी संघर्ष अत्यधिक बढ़ जाएगा। आदिवासी समुदाय के पुरखा देव स्थल, धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था केंद्र तथा पारंपरिक पूजा स्थल प्रस्तावित खनन क्षेत्र में स्थित हैं, जिनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हजारों किसानों की कृषि भूमि, जलस्रोत एवं आजीविका प्रभावित होगी। पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता तथा स्थानीय जल स्रोतों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

रैली का नहीं लिया अनुमति : एसडीएम

आज ग्रामीणों द्वारा केपीसीएल के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में लोग विरोध करने एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे, ग्रामीण नारे बाजी करते हुए एसडीएम धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपा है तो वहीं एसडीएम भगत ने कड़े शब्दों में आंदोलनकारियों को चेतावनी दिया है इस तरह के बिना अनुमति के आंदोलन, रैली करना सख्त मना है। रैली निकालने से पहले प्रशासन से अनुमति लेना था अनुमति के बिना रैली निकालना कनूनन गलत है। रैली का नेतृत्व करने वालों के खिलाफ कार्यवाही किया जायेगा।

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