छत्तीसगढ़

सरकारी मदद का इंतजार खत्म, ग्रामीणों ने खुद उठाया सड़क सुधारने का बीड़ा, चंदा जुटाकर मुरम-गिट्टी से सड़क सुधारने में जुटे झालरोदा के ग्रामीण, कीचड़ और गड्ढों से वर्षों से परेशान थे लोग

जोहार छत्तीसगढ़-सक्ती।
सक्ती जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत झालरोदा में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के दिनों में गांव की मुख्य सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। सड़क की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। लंबे समय से सड़क सुधार की मांग कर रहे ग्रामीणों ने जब शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित पहल नहीं देखी, तो उन्होंने अब खुद ही समस्या का समाधान करने का निर्णय लिया है। झालरोदा के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्र करना शुरू किया और इसी राशि से सड़क पर मुरम व गिट्टी डालकर उसे आवागमन के योग्य बनाने का काम शुरू कर दिया है।

हर घर से जुटाया जा रहा सहयोग

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की हालत सुधारने के लिए गांव के लोगों ने आपसी सहमति से जनसहयोग जुटाने का निर्णय लिया। इसके तहत गांव के प्रत्येक घर से अपनी क्षमता के अनुसार चंदा एकत्र किया जा रहा है। इस राशि से मुरम, गिट्टी सहित अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। ग्रामीण केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि सड़क सुधार कार्य में श्रमदान भी कर रहे हैं। ग्रामीण मिलकर सड़क पर सामग्री डालने, गड्ढों को भरने और रास्ते को समतल करने का काम कर रहे हैं।

बारिश में सड़क बन जाती है दलदल

ग्रामीणों के अनुसार बारिश शुरू होते ही गांव की मुख्य सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है। जगह-जगह पानी जमा होने के साथ सड़क पर कीचड़ फैल जाता है। कई स्थानों पर बड़े गड्ढे होने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी परेशानी होती है। पैदल चलने वाले ग्रामीणों के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है तो बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

मरीजों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़क का असर सिर्फ सामान्य आवागमन पर नहीं, बल्कि जरूरी सेवाओं पर भी पड़ रहा है। किसी व्यक्ति के बीमार होने या अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान एंबुलेंस या अन्य वाहन के गांव तक पहुंचने में भी दिक्कत होने की स्थिति बन जाती है। वहीं स्कूली बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। कई बार फिसलन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

बार-बार मांग के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से सड़क सुधार की मांग की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक समस्या पहुंचाने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुधार के लिए स्वयं चंदा जुटाकर काम करना उनकी मजबूरी है।

जनसहयोग बना मिसाल, अब शासन से स्थायी सड़क की मांग

झालरोदा के ग्रामीणों द्वारा मिल-जुलकर सड़क सुधारने की पहल गांव की एकजुटता की मिसाल बनकर सामने आई है। ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया कि समस्या सामने आने पर सामूहिक प्रयास से भी काफी कुछ किया जा सकता है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मुरम और गिट्टी डालकर सड़क को अस्थायी रूप से चलने योग्य बनाया जा सकता है, लेकिनस्थायी समाधान पक्की सड़क के निर्माण से ही संभव है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि झालरोदा की मुख्य सड़क की वास्तविक स्थिति का स्थल निरीक्षण कराया जाए और सड़क निर्माण के लिए आवश्यक राशि स्वीकृत कर पक्की एवं गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में हर साल ग्रामीणों को इसी समस्या से दो-चार न होना पड़े। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास के बाद जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और झालरोदा के ग्रामीणों को स्थायी सड़क की सुविधा कब तक मिल पाती है।

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