जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
नगर पंचायत धरमजयगढ़ में चुनाव हुए करीब दो वर्ष होने को हैं, लेकिन नगर के विकास कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग समय पर नहीं होना और कुछ मामलों में राशि वापस चले जाने की बात सामने आने से नगरवासियों में नाराजगी देखी जा रही है। इसी बीच भाजपा मीडिया प्रभारी के बयान पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि नगर में विकास कार्यों की गति धीमी है, स्वीकृत कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं और योजनाओं की राशि वापस जा रही है, तो क्या इसके लिए गुटबाजी जिम्मेदार नहीं है? अथवा नगर पंचायत की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए?
बस स्टैंड सौंदर्यीकरण की राशि को लेकर सवाल
नगर के बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण के लिए डीएमएफ मद से करीब 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत गई थी। इस कार्य को लेकर टेंडर प्रक्रिया भी पूरी होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद यदि स्वीकृत राशि वापस चली गई है, तो नगरवासियों का सीधा सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
यदि टेंडर जारी होने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हुआ और राशि वापस चली गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या इसके लिए नगर पंचायत, संबंधित जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय की गई? इस पूरे मामले की स्थिति भाजपा मीडिया प्रभारी को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
नगरवासियों का यह भी सवाल है कि बस स्टैंड सौंदर्यीकरण के लिए जारी टेंडर को निरस्त कराने क्या सांसद के समक्ष संगठन के कुछ लोग नहीं गए थे? यदि ऐसा हुआ था तो उसका कारण और परिणाम भी जनता के सामने आना चाहिए।
मीडिया प्रभारी के वार्ड में पेयजल की स्थिति पर भी सवाल
भाजपा मीडिया प्रभारी जिस वार्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहां पेयजल व्यवस्था को लेकर भी लोगों की परेशानियों की चर्चा है। गर्मी और बारिश के मौसम में भी यदि वार्डवासियों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि नगर में विकास की वास्तविक स्थिति क्या है?
नगर विकास की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों को यह बताना चाहिए कि उनके अपने वार्ड में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति कैसी है। केवल समाचारों का खंडन करने के बजाय जमीनी समस्याओं का समाधान करना ही जनता के लिए वास्तविक विकास माना जाएगा।
वार्ड क्रमांक 8 की कथित नाली अनियमितता का मामला भी चर्चा में
नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 में नाली निर्माण को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए थे। भाजपा के ही एक पार्षद द्वारा आरोप लगाया गया था कि बिना नाली बनाए लगभग चार लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया।
यदि आरोप गलत थे तो संबंधित दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं यदि बिना कार्य के भुगतान हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मामले में थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई थी। लेकिन सवाल यह है कि आवेदन के बाद आगे क्या कार्रवाई हुई? क्या पुलिस ने मामले में जांच शुरू की? क्या नगर पंचायत के संबंधित दस्तावेजों की जांच हुई? क्या स्थल निरीक्षण कराया गया? और यदि सरकारी राशि के भुगतान में अनियमितता पाई गई है तो अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सिर्फ आवेदन नहीं, जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग
नगरवासियों का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि ने भ्रष्टाचार या फर्जी भुगतान का आरोप लगाया है, तो केवल थाने में आवेदन देकर मामला छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। संगठन के पदाधिकारियों और संबंधित पार्षदों को यह भी बताना चाहिए कि मामले की जांच कहां तक पहुंची और जिम्मेदार अधिकारियों को क्या रिपोर्ट सौंपी गई।
वहीं भाजपा मीडिया प्रभारी से भी सवाल है कि उन्हें इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण की राशि वापस क्यों गई, वार्डों में पेयजल की समस्या क्यों बनी हुई है, वार्ड क्रमांक 8 में कथित बिना काम के भुगतान की जांच क्यों नहीं हुई और एफआईआर के आवेदन पर आगे क्या कार्रवाई हुई—इन सवालों का जवाब जनता जानना चाहती है।
विकास पर राजनीति नहीं, जवाबदेही जरूरी
नगरवासियों के लिए गुटबाजी की राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण सड़क, नाली, पानी, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं हैं। यदि विकास कार्यों में राजनीतिक खींचतान बाधक बन रही है तो उसे समाप्त करना जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक संगठनों की जिम्मेदारी है।
वहीं यदि विकास कार्य नहीं होने के पीछे प्रशासनिक या तकनीकी कारण हैं तो उन्हें भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जनता के पैसे से स्वीकृत योजनाओं की राशि वापस जाना किसी भी स्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
अब देखना होगा कि भाजपा मीडिया प्रभारी इन सवालों का तथ्यों और दस्तावेजों के साथ जवाब देते हैं या फिर इसे भी केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताकर खारिज कर दिया जाएगा। नगरवासियों की मांग है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो और नगर विकास के लिए स्वीकृत राशि का समय पर सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए।








