छत्तीसगढ़

आखिर क्या हुआ कि नहीं टूटी दुकान?…  तहसीलदार लाव-लश्कर के साथ पहुंचे थे कार्रवाई करने, समय बीतने के बाद भी दुकान जस की तस

जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ क्षेत्र के बायसी कॉलोनी में सड़क किनारे स्थित एक दुकान इन दिनों ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान की स्थिति ऐसी जगह पर है, जहां से सड़क के दोनों ओर का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देता। इसके कारण यहां लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक इस स्थान पर दुर्घटनाओं में दो लोगों की जान भी जा चुकी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए दुकान को हटाने की कार्यवाही शुरू की गई थी। बताया जा रहा है कि तहसीलदार स्वयं अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और अमले के साथ दुकान को हटाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। उस समय ऐसा लगा था कि अब दुकान को हटाकर दुर्घटना संभावित स्थान को सुरक्षित कर दिया जाएगा।

तहसीलदार पहुंचे, लेकिन दुकान नहीं टूटी

ग्रामीणों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान दुकानदार ने दुकान हटाने के लिए कुछ दिनों का समय मांगा था। दुकानदार की मांग पर प्रशासन द्वारा उसे दो-चार दिन का समय दिए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन अब लगभग एक माह का समय बीतने को है और दुकान अभी भी उसी स्थान पर मौजूद है। यही वजह है कि ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्रशासन ने दुकान को हटाने का निर्णय लिया था और तहसीलदार स्वयं अमले के साथ कार्रवाई करने मौके पर पहुंच गए थे, तो आखिर बाद में ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि कार्रवाई रुक गई?

दुकान के कारण दोनों ओर का रास्ता नहीं दिखने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि बायसी गांव की ओर से आने वाले वाहन चालकों को मुख्य सड़क के दोनों ओर का रास्ता दुकान के कारण स्पष्ट दिखाई नहीं देता। विशेषकर मोटरसाइकिल, साइकिल और कार से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थान दुर्घटना का कारण बना है? ग्रामीणों के अनुसार जब दो वाहन एक-दूसरे की दिशा से आते हैं तो दुकान के कारण आने वाला वाहन समय रहते दिखाई नहीं देता। ऐसे में अचानक सामने वाहन आने पर दुर्घटना की स्थिति निर्मित हो जाती है। ग्रामीणों ने दावा किया कि इसी स्थान पर पहले भी गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और दो लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद यदि संभावित दुर्घटना वाले स्थान से अतिक्रमण अथवा दुकान को हटाने की कार्यवाही अधूरी रहती है, तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

नेताओं और दुकानदार की बात मानने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि जब तहसीलदार कार्यवाही करने पहुंचे थे, तब कुछ नेताओं और दुकानदार की ओर से दुकान हटाने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्यवाही करने के बजाय दुकान हटाने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया। अब सवाल यह है कि जब कुछ दिनों के लिए दिया गया समय सीमा खत्म हो गया, तो प्रशासन द्वारा आगे की बेदखली कार्रवाई क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि क्या किसी राजनीतिक दबाव या प्रभाव के कारण कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली गई है?

ग्रामीणों का सीधा सवाल, आखिर कार्यवाही क्यों रुकी?

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा शिकायत पर संज्ञान लेना और तहसीलदार का स्वयं मौके पर पहुंचना इस बात का संकेत था कि मामला गंभीर है। लेकिन कार्यवाही शुरू होने के बाद भी दुकान का नहीं हटना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके का दोबारा निरीक्षण करे, सड़क की स्थिति और दुर्घटना की संभावना को देखते हुए आवश्यक कार्यवाही करे तथा यदि दुकान वास्तव में शासकीय भूमि, सड़क सीमा या सार्वजनिक रास्ते में आती है तो नियमानुसार बेदखली की कार्यवाही पूरी की जाए।

अब देखना होगा, दुकान हटेगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में जाएगा?

बायसी कॉलोनी की इस दुकान को लेकर अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। तहसीलदार के अमले के साथ मौके पर पहुंचने के बावजूद कार्यवाही पूरी नहीं होने से ग्रामीणों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर वह कौन सी वजह है जिसके कारण कार्यवाही के लिए पहुंचे प्रशासन को वापस लौटना पड़ा? क्या दुकानदार को दिया गया समय अब भी जारी है? क्या दुकान हटाने का प्रशासनिक आदेश अभी प्रभावी है? और यदि कार्यवाही का निर्णय हो चुका था तो लगभग एक माह बाद भी दुकान जस की तस क्यों है? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी भी दबाव या प्रभाव से परे होकर सड़क सुरक्षा और जनहित को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यदि इस स्थान पर दोबारा कोई गंभीर दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

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