जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में आने वाले समय में कई बड़े कोयला खनन प्रोजेक्ट शुरू होने की तैयारी में हैं। इनमें एसईसीएल, केपीसीएल और अदानी समूह के पुरूंगा कोल ब्लॉक प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि अभी तक इन परियोजनाओं से संबंधित पर्यावरणीय जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, लेकिन कोल ब्लॉक के लिए चिन्हित अथवा आबंटित भूमि पर निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि कोल ब्लॉक के लिए आबंटित भूमि पर शेड, राइस मिल और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोल ब्लॉक के लिए भूमि आबंटित होने के बाद उस जमीन पर नए निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई? यदि निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
आबंटन के बाद हुए निर्माण की वैधता पर सवाल
कोल ब्लॉक के लिए भूमि चिन्हित या आबंटित किए जाने के बाद उस भूमि के उपयोग और निर्माण गतिविधियों को लेकर प्रशासनिक अनुमति का विषय महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि संबंधित भूमि भविष्य में खनन परियोजना के लिए उपयोग में लाई जानी है, तो वहां बाद में किए गए निर्माणों की वैधता, अनुमति और रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोल ब्लॉक क्षेत्र में कई स्थानों पर शेड, राइस मिल तथा अन्य निर्माण दिखाई दे रहे हैं। इन निर्माणों को लेकर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि निर्माण से पहले संबंधित विभागों से अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या निर्माण के लिए भूमि उपयोग की अनुमति प्राप्त थी।
क्या निर्माण का मिलेगा मुआवजा?
इस पूरे मामले में दूसरा बड़ा सवाल मुआवजे को लेकर है। यदि कोल ब्लॉक परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण होता है और उस जमीन पर पहले से निर्मित भवन, शेड, राइस मिल अथवा अन्य संरचनाएं मौजूद हैं, तो उनके मूल्यांकन और मुआवजे का निर्धारण किस नियम के तहत किया जाएगा? यदि किसी व्यक्ति ने कोल ब्लॉक के लिए भूमि आबंटन के बाद निर्माण किया है, तो ऐसे निर्माण की वैधता और मुआवजे की पात्रता की जांच होना जरूरी है। प्रशासन को निर्माण की तारीख, भूमि का रिकॉर्ड, निर्माण अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बंग समाज को आबंटित जमीन की खरीद-बिक्री पर भी उठे सवाल
धरमजयगढ़ क्षेत्र में बंग समाज के परिवारों को शासन की ओर से जीवन-यापन के लिए शासकीय भूमि आबंटित किया गया था। लंबे समय से भूमि स्वामी हक की मांग के बाद भाजपा शासनकाल में क्षेत्र में निवासरत बंग समाज के लोगों को भूमि स्वामी हक दिया गया। भूमि स्वामी हक मिलने के बाद बड़ी संख्या में जमीनों की खरीद-बिक्री होने लगा है। बंग समाज को उनके भूमि का भूमि स्वामी हक जरूर दिया गया है लेकिन खरीद बिक्री की अनुमति नहीं दिया गया है। यादि किसी को जमीन की बिक्री करना है तो दसके लिए कलेक्टर से अनुमति लेना अनिर्वाय है। लेकिन धरमजयगढ़ क्षेत्र में ज्यादातर बंगालियों के जमीन खरीदी बिक्री से पहले अनुुमति नहीं लिया गया है। इसी जमीन पर अब राइस मिल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या सभी जमीनों की खरीद-बिक्री नियमानुसार हुई है? क्या संबंधित मामलों में कलेक्टर की अनुमति ली गई थी? और यदि अनुमति आवश्यक थी तो बिना अनुमति के खरीद-बिक्री का पंजीयन कैसे हुआ?
जांच हो तो सामने आ सकता है बड़ा मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि धरमजयगढ़ क्षेत्र में बंग समाज को आबंटित भूमि की पिछले वर्षों की खरीद-बिक्री की व्यापक जांच कराई जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया होगा। हाल के दिनों में आबंटन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में एफआईआर हुआ है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को धरमजयगढ़ क्षेत्र में भी आबंटित भूमि की खरीद-बिक्री के मामलों की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन जमीनों का हस्तांतरण नियमों के अनुसार हुआ और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ।
केपीसीएल को हो सकता है करोड़ों का नुकसान?
धरमजयगढ़ क्षेत्र में केपीसीएल को आबंटित कोल ब्लॉक क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्माण कार्य होने के आरोपों ने परियोजना की लागत और भविष्य में होने वाले मुआवजे को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि कोल ब्लॉक आबंटन के बाद बड़े पैमाने पर शेड, राइस मिल और अन्य संरचनाओं का निर्माण हुआ है, तो परियोजना शुरू होने के बाद इनका मूल्यांकन करना पड़ सकता है। इससे परियोजना पर अतिरिक्त वित्तीय भार पडऩे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन करे रिकॉर्ड की जांच
पूरे मामले में अब स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन को कोल ब्लॉक क्षेत्र की भूमि का रिकॉर्ड खंगालते हुए यह जांच करनी चाहिए कि भूमि कब आबंटित हुई, उसके बाद कब-कब निर्माण हुए, निर्माण के लिए किस विभाग से अनुमति ली गई और संबंधित जमीनों की खरीद-बिक्री किस प्रक्रिया के तहत हुई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कोल ब्लॉक के लिए आबंटित भूमि पर निर्माण की अनुमति देने वाला विभाग कौन है और यदि निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो अब तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर सवालों पर जांच शुरू करता है या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।








