छत्तीसगढ़

क्या धरमजयगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था हो गई है नेतृत्वविहीन? सिविल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर मंडल महामंत्री ने बीएमओ को सुनाई खरी-खोटी

जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ के सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच सामने आ रही शिकायतों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सिविल अस्पताल की लचर व्यवस्था को लेकर भाजपा मंडल महामंत्री भोगेश्वर बेहरा ने बीएमओ से सीधे सवाल करते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की है। भोगेश्वर बेहरा ने अस्पताल की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि धरमजयगढ़ का सिविल अस्पताल नेतृत्वविहीन हो गया है। अस्पताल में व्यवस्थाएं अपने हिसाब से चल रही हैं और मरीजों की परेशानियों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए मरीजों और उनके परिजनों को परेशान होना पड़े, यह गंभीर चिंता का विषय है।

मौत के बाद घंटों तक वार्ड में पड़ी रही महिला की लाश, उठे गंभीर सवाल

23 अगस्त को एक महिला की उपचार के दौरान मौत होने के बाद कई घंटों तक शव को वार्ड से नहीं हटाया गया। बताया जा रहा है कि शव मरीजों के बीच ही पड़ा रहा और आसपास भर्ती मरीजों तथा उनके परिजनों को उसी वातावरण में रहने और भोजन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर महिला की मौत के बाद शव को समय पर मरचुरी में क्यों नहीं पहुंचाया गया? क्या शव को वार्ड से मरचुरी तक पहुंचाने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति आवश्यक थी या फिर यह अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम था? अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों के बीच शव का लंबे समय तक वार्ड में रहना न केवल असहज स्थिति पैदा करता है, बल्कि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

फिल्म नहीं, मोबाइल से फोटो खींच लो!

सिविल अस्पताल में एक और गंभीर मामला एक्स-रे सुविधा लेकर है। डॉक्टर द्वारा मरीज को एक्स-रे लिखे जाने के बाद जब मरीज एक्स-रे कराने पहुंचता है तो एक्स-रे के बाद कर्मचारी मरीज से कहते हैं कि मोबाइल से फोटो खींच लो, फिल्म नहीं है। यह मरीजों के साथ गंभीर समस्या है। मरीज से एक्स-रे की निर्धारित फीस ली जाती है, तो फिर एक्स-रे की फिल्म उपलब्ध क्यों नहीं है? क्या जीवनदीप समिति के पास एक्स-रे फिल्म खरीदने के लिए पर्याप्त राशि नहीं है? यदि मरीज मोबाइल से एक्स-रे की तस्वीर लेकर डॉक्टर के पास जाता है तो क्या उससे चिकित्सक को बीमारी या चोट की स्थिति उतनी ही स्पष्टता से समझने में मदद मिलता है? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रबंधन और जीवनदीर समिति को देना चाहिए।

मरीजों के भोजन की व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सरकार की ओर से अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए भोजन, नाश्ता और फल आदि की व्यवस्था के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को इलाज के दौरान भोजन की समस्या न हो। लेकिन धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में मरीजों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेने वाले ठेकेदार द्वारा भोजन की व्यवस्था एक छोटे ठेले वाले को सौंप दी गई है। मरीजों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। मरीजों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन मिल रहा है या नहीं, भोजन निर्धारित मीनू के अनुसार दिया जा रहा है कि नहीं जीवन दीप समिति को ध्यान देना चाहिए।

क्या जीवन दीप समिति की कोई जिम्मेदारी नहीं ?

सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने और अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जीवनदीप समिति का गठन किया जाता है। ऐसे में अस्पताल में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच समिति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या जीवनदीप समिति के सदस्यों ने कभी अस्पताल में मरीजों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की? क्या मरीजों को शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन मिल रहा है? अस्पताल में एक्स-रे फिल्म की उपलब्धता और अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति की जांच समिति ने की है? जीवनदीप समिति कभी अस्पताल में संचालित दवाई दुकान की जांच की है, क्या शासकीय दवाई दुकान में मरीजों के लिए सस्ती दवाई उपलब्ध है? इन सवालों का जवाब जीवनदीप समिति के सदस्यों को देना चाहिए क्षेत्रवासियों को। 23 अगस्त को महिला की मौत के बाद शव कई घंटों तक वार्ड में रहने के मामले में क्या समिति के किसी सदस्य ने बीएमओ से जवाब मांगा? जब नगर का एकमात्र सिविल अस्पताल का ये हाल है तो फिर ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधा का क्या हाल हो सकता है ये आप खुद सोच सकते हैं।

सीएम से हुई थी बीएमओ बदलने की मांग

खण्ड चिकित्साधिकारी की कार्यप्रणाली से नाजार भाजपा नेताओं ने बीएमओ की शिकायत लेकर रायपुर गये थे। सीएम से बीएमओ बदलने की मांग भी किया था, सीएम ने तत्काल स्वास्थ्य सचिव से बात कर स्वास्थ्य सुविधा सुधारने को कहा था। लेकिन इसके बाद भी धरमजयगढ़ का ना तो बीएमओ बदला और न ही स्वास्थ्य सुविधा में कोई सुधार हुआ।

ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सहारा सिविल अस्पताल

धरमजयगढ़ क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीण मरीज इलाज के लिए सिविल अस्पताल पर निर्भर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल ही सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में यदि अस्पताल में शव प्रबंधन, एक्स-रे, भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती हैं तो यह केवल अस्पताल की समस्या नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। भाजपा मंडल महामंत्री भोगेश्वर बेहरा ने अस्पताल प्रबंधन से व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग करते हुए कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज और सम्मानजनक वातावरण मिलना उनका अधिकार है। अस्पताल की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। अब देखना होगा कि इन गंभीर सवालों पर स्वास्थ्य विभाग, बीएमओ और जीवनदीप समिति क्या जवाब देते हैं और क्या धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तव में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं?

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