जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत रायमेर में शासकीय भूमि के खसरा नंबरों में कथित हेरफेर कर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री किए जाने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में तत्कालीन पटवारी राकेश साय समेत अन्य लोगों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस की यह कार्यवाही राजस्व विभाग से प्राप्त शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर हुई है। तहसीलदार कापू द्वारा थाना प्रभारी कापू को पत्र क्रमांक 279/वा.तह./2026, दिनांक 11 अगस्त 2026 को भेजा गया था। इससे पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धरमजयगढ़ के कार्यालय से भी संबंधित मामले में कार्यवाही के लिए पत्र जारी किया गया था। शिकायत में ग्राम रायमेर की शासकीय भूमि को कथित रूप से खसरा बटांकन के माध्यम से अलग-अलग हिस्सों में दर्ज कर निजी व्यक्तियों के नाम किए जाने का उल्लेख है।
शासकीय भूमि के खसरा नंबरों में हेरफेर का आरोप
दस्तावेज में खसरा नंबर 479/2, 467/36, 467/25 एवं 467/23 का उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक इन जमीनों का रकबा क्रमश: अलग-अलग दर्ज कर बाद में कथित रूप से अन्य व्यक्तियों के नाम अंतरण किया गया। ग्रामीणों की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि शासकीय भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराकर आगे बिक्री की प्रक्रिया की गई। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि ग्राम रायमेर के ग्रामीणों द्वारा शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। शिकायत में बाहरी व्यक्तियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी पट्टा तैयार करने और दलालों के माध्यम से फर्जी रजिस्ट्री कराए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
तत्कालीन पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल
राजस्व विभाग की ओर से प्रस्तुत शिकायत में तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश साय, पिता शशिभूषण साय, की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित शासकीय भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया में तत्कालीन पटवारी की भूमिका रही। इसके अलावा मामले में कैलाश कुमार जेठवानी तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दस्तावेज में विक्रेता के रूप में उजीतराम, पिता नन्हीराम, निवासी उदउदा-पोराडाही का नाम भी उल्लेखित है। वहीं शिकायत एवं दस्तावेजी कार्रवाई में अगस्तुस खलखो तथा लालबहादुर यादव सहित अन्य लोगों का भी उल्लेख गवाह के रूप में किया गया है।
कूटरचित दस्तावेज और जमीन की खरीद-बिक्री का मामला
शिकायत के अनुसार, शासकीय भूमि को कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने के बाद उसकी खरीद-बिक्री की गई। मामले में जमीन के दस्तावेज, नामांतरण, खसरा बंटांकन और रजिस्ट्री से संबंधित रिकॉर्ड को जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध
एफआईआर के विवरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 तथा 120(बी) सहित संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, कूटरचना, कूटरचित दस्तावेज को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करने और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोपों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
अब पुलिस द्वारा राजस्व रिकॉर्ड, खसरा-पंचसाला, नामांतरण एवं बंटांकन संबंधी दस्तावेजों के साथ-साथ जमीन की रजिस्ट्री और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत कथित गड़बड़ी हुई।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामला पहुंचा पुलिस तक
बताया गया है कि ग्राम रायमेर के ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। शिकायत में शासकीय भूमि को निजी नामों पर दर्ज किए जाने और बाद में उसके हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद तहसील स्तर से दस्तावेजों की जांच कर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब निगाहें पुलिस की विवेचना पर टिकी हैं। एफआईआर की खबर लगते ही सभी आरोपी फरार हो गये हैं, हम आपको बता दे कि पटवारी राकेश साय पर जमीन फर्जीवाड़ा के मामले में पूर्व में भी पुलिस थाना में एफआईआर हो रखा है, ऐसे में पटवारी पर जमीन फर्जीवाड़ा के दो मामले में पुलिस पटवारी राकेश साय की तलाश कर रहे हैं।








