जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
रायगढ़ जिले के सबसे बड़े आदिवासी बहुल विकासखंड धरमजयगढ़ में अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब 118 ग्राम पंचायतों वाली धरमजयगढ़ जनपद पंचायत में पंचायत सचिवों के मुख्यालय में नहीं रहने का मामला चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकत्तर पंचायत सचिव अपने निर्धारित पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण उन्हें शासकीय योजनाओं और पंचायत से जुड़े जरूरी कामों के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। शासन की व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों को अपने निर्धारित मुख्यालय में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके। लेकिन धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र में स्थिति इसके विपरीत नजर आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक सचिव अपने पंचायत मुख्यालय से काफी दूरी पर निवास करते हैं और वहीं से पंचायत का कामकाज संचालित करते हैं?
ग्रामीणों को करना पड़ता है इंतजार
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पंचायत संबंधी दस्तावेज, शासकीय योजनाओं की जानकारी, पेंशन, आवास योजना, ग्राम सभा से जुड़े कार्य और अन्य पंचायत स्तरीय सेवाओं के लिए ग्रामीणों को सचिव की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन यदि सचिव ही पंचायत मुख्यालय में उपलब्ध न हो तो ग्रामीणों के सामने परेशानी खड़ी होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी जरूरी काम के लिए पंचायत कार्यालय पहुंचने के बाद पता चलता है कि सचिव मौजूद नहीं हैं। इसके बाद सचिव के पंचायत आने का इंतजार करना पड़ता है तो कभी उनके निवास स्थान तक जाना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीणों को उठानी पड़ती है। सीमित साधनों के बीच कई किलोमीटर की दूरी तय कर पंचायत कार्यालय पहुंचने वाले ग्रामीणों को यदि सचिव नहीं मिलते हैं तो उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
लैलूंगा में रहकर धरमजयगढ़ की पंचायतों का काम?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल उन पंचायत सचिवों को लेकर उठ रहा है, जिनके बारे में ग्रामीणों का दावा है कि वे लैलूंगा विकासखंड क्षेत्र में निवास करते हुए धरमजयगढ़ विकासखंड की पंचायतों का काम संभाल रहे हैं। निर्धारित मुख्यालय से इतनी दूरी पर रहकर पंचायत सचिव अपने दायित्वों का निर्वहन कैसे कर रहे हैं? क्या उन्हें मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति प्राप्त है? यदि अनुमति नहीं है तो अब तक संबंधित कर्मचारियों पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
मुख्यालय की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित?
सरकार ग्रामीणों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर तक व्यवस्था खड़ी करती है। पंचायत सचिव इसी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में यदि कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर ही उपलब्ध नहीं होंगे तो शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का उद्देश्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिवों के मुख्यालय में रहने की व्यवस्था की निगरानी जनपद पंचायत के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और पंचायतों में सचिवों की उपस्थिति की वास्तविक स्थिति जांचें तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अधिकारी सब जानते हैं तो कार्यवाही क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल अब जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहा है। यदि पंचायत सचिव मुख्यालय में नहीं रह रहे हैं और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को है, तो फिर अब तक इस मामले में कार्यवाही क्या नहीं की गई?
ग्रामीणों ने कार्यवाही की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली सभी 118 ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवों के निवास एवं मुख्यालय में उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए। पंचायतवार जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कौन सचिव निर्धारित मुख्यालय में रह रहा है और कौन मुख्यालय से बाहर रहकर कार्य कर रहा है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आते हंै तो संबंधित सचिवों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवही की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े। अब देखने वाली बात यह होगी कि धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस शिकायत को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।








