छत्तीसगढ़

नगर विकास के लिए धरमजयगढ़ नगर पंचायत को मिले करोड़ों रुपये… विकास होगा या फिर गुटबाजी की भेंट चढ़ जाएगा करोड़ों का बजट?

जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ नगर के विकास को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा नगर विकास के लिए करोड़ों रुपये की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद शासन स्तर से धरमजयगढ़ नगर पंचायत को विभिन्न विकास कार्यों के लिए राशि भी जारी की गई और नगर पंचायत द्वारा कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लिया गया। ऐसे में अब नगरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन प्रस्तावित कार्यों का धरातल पर होगा की नहीं? यदि प्रस्तावित कार्य पूरे होते हैं तो धरमजयगढ़ नगर की तस्वीर बदल सकती है। नगर में बेहतर सड़क निर्माण के साथ गौरव पथ, पुष्प वाटिका तथा स्थानीय खिलाडिय़ों के लिए खेल मैदान जैसी सुविधाएं विकसित होने की उम्मीद है। लेकिन सवाल यही है कि शासन से राशि मिलने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी विकास कार्यों को गति मिलेगी या फिर राजनीतिक खींचतान और आपसी मतभेद विकास की राह में बाधा बनेंगे?

बस स्टैंड की बदहाली पहले ही खड़े कर चुकी है सवाल

धरमजयगढ़ के बस स्टैंड का मामला नगर विकास की स्थिति को समझने के लिए बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। बस स्टैंड को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने के लिए कलेक्टर रायगढ़ द्वारा एक करोड़ रुपये की राशि जारी किया गया था। इसके बावजूद आज भी नगरवासियों को एक व्यवस्थित और सुविधाजनक बस स्टैंड का इंतजार है। ऐसे में नगरवासियों का सवाल है कि जब एक महत्वपूर्ण विकास कार्य के लिए राशि उपलब्ध कराई गई थी, तो उसका अपेक्षित परिणाम धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दिया? क्या स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां विकास कार्यों पर भारी पड़ीं?

नेताओं को नगर विकास पर ध्यान देना होगा, गुटबाजी पर नहीं

नगर पंचायत चुनाव के बाद ऐसा लगा रहा था कि राज्य और नगर में एक ही सरकार होने के कारण नगर का विकास होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, नगर विकास पूरी तरह ठप हो गया है। शासन से आये राशि वापस चले जाना सबसे बड़ा विडंबना है। नेताओं को नगर विकास की ओर ध्यान देना चाहिए न की गुटबाजी पर, अगर अभी भी सत्ता पक्ष गुटबाजी खत्म नहीं करते तो आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सिर्फ समाचार पत्र में नहीं वस्ताव में देखे गुटबाजी है कि नहीं

सत्ता पक्ष के नेता समाचार पत्रों में सफाई देते हैं कि कोई गुटबाजी नहीं है, मनभेद है मतभेद नहीं यहा सिर्फ समाचार पत्रों में ही ठीक लगता है। जमीनी हकीकत कुछ और है, नेताजी जरा नगर वासियों को बताए नगर विकास क्यों ठप पड़ा है? डीएमएफ मद से जारी राशि वापस क्यों गया? नगरवासियों को क्यों नहीं मिला एक सुंदर बस स्टैण्ड? इन सारी सवालों का जवाब ईमानतारी से देना चाहिए नगर के नेताओं को?

करोड़ों की राशि से जनता को क्या मिलेगा, अब यही असली सवाल

नगर विकास के लिए जारी करोड़ों रुपये केवल सरकारी आंकड़ा बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका लाभ धरमजयगढ़ की जनता को दिखाई देना चाहिए। सड़क, खेल मैदान, पुष्प वाटिका और अन्य प्रस्तावित कार्य यदि समय पर पूरे होते हैं तो निश्चित रूप से नगर के विकास को नई दिशा मिल सकती है। लेकिन यदि राजनीतिक खींचतान, आपसी मतभेद के कारण कार्य अटकते हैं, तो इसका सीधा नुकसान नगरवासियों को होगा। अब सवाल सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओं और नगर पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से है, शासन से जारी करोड़ों रुपये से धरमजयगढ़ का वास्तविक विकास होगा या फिर यह राशि भी राजनीतिक गुटबाजी की भेंट चढ़ जाएगी? अब देखना होगा कि करोड़ों रुपये की योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर उतरती हैं या फिर गुटबाजी का भेंट चढ़ता है।

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