छत्तीसगढ़

सिविल अस्पताल में मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल… 70 रुपये में दो समय का खाना और नाश्ता!… ठेके की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, शासन की राशि और मरीजों तक पहुंच रहे भोजन की गुणवत्ता की हो जांच

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ के सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके साथ देखरेख के लिए आने वाले परिजनों को शासन की योजना के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल में मरीजों को भोजन एवं नाश्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था संचालित है, लेकिन इस व्यवस्था में ठेकेदार से लेकर स्थानीय स्तर पर भोजन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति तक की पूरी प्रक्रिया को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने का ठेका बिलासपुर के किसी ठेकेदार को मिला हुआ है। बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा धरमजयगढ़ में एक छोटे ठेला संचालक को मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने का काम दिया गया है। स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि एक मरीज के लिए दो समय के भोजन और नाश्ते के एवज में करीब 70 रुपये की राशि में भोजन उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। महंगाई के इस दौर में 35 रुपये प्रति भोजन के हिसाब से मरीजों को आखिर किस गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है? मरीज अस्पताल में बीमारी से जूझ रहा होता है और ऐसे समय में उसे पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना बेहद जरूरी है।

शासन की राशि और मरीजों तक पहुंचने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल

बताया जा रहा है कि शासन की ओर से मरीजों के भोजन के लिए प्रति मरीज निर्धारित राशि इससे कहीं अधिक है। ऐसे में यदि ठेकेदार और स्थानीय स्तर पर भोजन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के बीच काफी कम राशि में भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, तो शेष राशि का उपयोग किस प्रकार हो रहा है और मरीजों को निर्धारित मापदंड के अनुसार भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक हो जाती है। शासन द्वारा भोजन का निर्धारित मेन्यू क्या है, प्रतिदिन कितनी मात्रा में भोजन दिया जाना है और भोजन की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदार अधिकारी को मरीजों को मिलने वाली भोजन की नियमित जांच करनी चाहिए?

मरीजों के भोजन में गुणवत्ता जांच जरूरी

अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए सामान्य व्यक्ति की तुलना में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता अधिक महत्वपूर्ण होती है। भोजन में पर्याप्त मात्रा में दाल, सब्जी, चावल, रोटी सहित निर्धारित पौष्टिक आहार मिल रहा है या नहीं, भोजन ताजा है या नहीं और निर्धारित मात्रा में दिया जा रहा है या नहीं, इन सभी बिंदुओं की नियमित जांच होनी चाहिए। यदि मरीजों के लिए निर्धारित बजट के मुकाबले बेहद कम राशि में भोजन तैयार कराया जा रहा है, तो संबंधित विभाग को यह भी देखना चाहिए कि भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और पौष्टिकता से किसी प्रकार का समझौता तो नहीं किया जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों एवं मरीजों के परिजनों में चर्चा है कि सिविल अस्पताल में मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, मेन्यू, भुगतान व्यवस्था और ठेके की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को अस्पताल में अचानक निरीक्षण कर मरीजों को दिए जा रहे भोजन के नमूने की जांच करवानी चाहिए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा कितनी राशि निर्धारित है और ठेकेदार को कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है। मरीजों के नाम पर मिलने वाली शासकीय राशि का पूरा लाभ मरीजों तक पहुंचना चाहिए। यदि भोजन की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्यवाही की जानी चाहिए। अब देखना यह होगा कि सिविल अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भोजन की गुणवत्ता और भुगतान व्यवस्था की जांच कराते हैं या फिर मरीजों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था इसी तरह सवालों के घेरे में बनी रहती है।

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