छत्तीसगढ़

ग्रामीणों ने अदाणी फाउंडेशन के स्वास्थ्य शिविर का कर रहे विरोध, अनुमति को लेकर उठ रहे सवाल… ग्रामीणों ने बताया हमे नहीं मालूम कि अदानी का स्वास्थ्या शिविर है … अदानी कंपनी का कोई सुविधा की जरूरत नहीं ग्रामीणों को

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ विकास खण्ड के तेन्दुमुड़ी गांव में अदाणी फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था। कंपनी द्वारा लगाये गये स्वास्थ्य शिविर में गांव के 43 लोगों ने अपना स्वास्थ्य की जांच करवाया है। जिसमें 17 पुरूष व 26 महिला बताये जा रहे हैं। ग्रामीणों में अब अदाणी फाउंडेशन का स्वास्थ्य शिविर का विरोध करने लगे हैं। ग्रामीणों ने हमारे टीम को बताया कि कंपनी हम लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए ऐसा ऐसा कर रहे हैं। अदानी कंपनी हमारे क्षेत्र में कोयला खदान खोलकर बीमार ही तो बनायेंगे तो फिर इनको स्वास्थ्य शिविर लगाने की जरूरत ही क्या है? हम बीमार होकर मरना पसंद करेंगे लेकिन अदानी कंपनी का स्वास्थ्य शिविर ही क्या किसी प्रकार का कोई सुविधा की जरूरत नहीं हैं। हम

कम पढ़े लिखे का फायदा ले रहे कोल कंपनी

ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर लोग कम पढ़े लिखे होते हैं जिसका फायदा ऐसे कंपनी वाले उठाते हैं, हमारे क्षेत्र में आकर गांव में कोयला खोदने वाले कंपनी स्वास्थ्य शिविर लगाये हैं हम लोगों को नहीं मालूम था क्योंकि गांव-गांव में सरकारी गाड़ी भी आते हैं ईलाज करने के लिए हम लोग सोचे कि ये वहीं गाड़ी है जो सरकार द्वारा भेजा है, अगर हम लोग को मालूम होता कि जो स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है वह कोयला कंपनी का है तो हम गांव में घूसने भी नहीं देते।

क्या स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए लिया गया था अनुमति?

ग्रामीण और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि गांव में इस तरह से कोई भी आकर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से अथवा सझम प्रशासनिक अधिकारियों से आवश्यक शिविर लगाने का अनुमति लिया था कि नहीं। क्योंकि स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से अनुमति की जरूरत होता है। धरमजयगढ़ में पहले भी वेदांता एवं डीवी पॉवर द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाता था उसके लिए कंपनी वाले कलेक्टर व सीएमएचओ से अनुमति के बाद भी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करते थे, लेकिन अदाणी फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए अनुमति लिया गया था कि नहीं ये सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है।

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