छत्तीसगढ़

धरमजयगढ़ के शांत फिजा को अशांत करने आ रहे कोल कंपनी, ग्रामीणों को मिलकर करना होगा कंपनी का विरोध… एसईसीएल, अदानी और केपीसीएल के दलालनुमा लोगों से प्रभावित ग्रामीणों को रहना होगा सावधान

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

रायगढ़ जिले के सबसे शांत व आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड धरमजयगढ़ को भी अशांत बनाने के लिए कई कंपनी आने को तैयार है। कोयला खदान आने से क्षेत्र का विकास कम होगा विनास अधिक होगा। धरमजयगढ़ का विनास न हो इसके लिए सभी को एक होकर इन कंपनियों का विरोध करना होगा प्रभावित ग्रामीणों को। कोयला खदान खुलने से जल स्तर में भारी गिरावट देखने को मिलेगा तो वहीं कृषि कार्य भी प्रभावित होंगे। एसईसीएल कंपनी द्वारा ड्रोन सर्वे का कार्य करने वाला था ग्रामीणों की मांग पर ड्रोन सर्वे वर्तमान में रूक है। ग्रामीणों ने एसईसीएल से मांग किया था कि ग्रामीणों के साथ बैंठक कर कंपनी अपना स्पष्ट करें कि ग्रामीणों को जमीन की कीमत क्या देगा, प्रभावितों को कंपनी नौकरी देंगे की नहीं, विस्थापितों को कहां पर विस्थापन करेंगे और भी कई मांग के साथ ग्रामीण कलेक्टर के पास जाकर जब तक कंपनी अपनी स्पष्ट मत नहीं देता तब तक एसईसीएल द्वारा ड्रोन सर्वे न करेने की मांग की थी ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर रायगढ़ ने एसईसीएल को धरमजयगढ़ में ड्रोन सर्वे वर्तमान में नहीं करने कहा गया।

ग्रामीणों ने कहा पहले से भी अधिक विरोध होगा अदानी का

धरमजयगढ़ के पुरूंगा गांव में अदानी का अंदर ग्राउंड कोल ब्लॉक का जन सुनवाई बहुत जल्द होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पुरूंगा कोल ब्लॉक की जन सुनवाई अगस्त माह तक हो सकता है। तो वहीं कंपनी भी अब एक्टीव मोड पर आ गये हैं कंपनी वाले अब गांव में कंपनी का विरोध कौन कर सकता है, ग्रामीणों को कौन समझा सकते हैं इसके लिए अभी से ग्रामीणों को प्रलोभन देकर तोड़-फोड करने में जूट गये हैं। तो वहीं ग्रामीणों ने बताया कि हम सब एक है कंपनी वालों का चाल हमारे यहां नहीं चलना है, किसी भी कीमत में हम लोगों को अदानी कंपनी वाले तोड़ नहीं सकेंगे। और अगर कोई कंपनी का दलाल बनकर काम करते हैं, और हम लोगों को पता चलता है कि फलाना आदमी कंपनी के साथ मिला हुआ है तो सोच ले क्या होगा कंपनी का दलाल का? ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग पहले से भी अधिक विरोध करेंगे क्योंकि अगर पुरूंगा में अदानी का कोल ब्लॉक खुलता है तो कुछ साल के लिए तो अंदर ग्राउंड होगा उसके बाद धीरे से ओपन कोल ब्लॉक बना देंगे जैसे छाल क्षेत्र में हुआ है। अंदर ग्राउंड कोल खदान होने से ग्रामीणों को पानी की भारी समस्या होगा, ग्रामीणों को खेती करने के लिए पानी नहीं मिलेगा, कुआं, हैण्डपंप पूरी तरह सुख जायेगा, क्षेत्र में बाहरी लोगों का आंतक देखने को मिलेगा हमारे शांत क्षेत्र को बाहरी लोग पूरी तरह अशांत बना देेंगे। और हम लोग किसी भी कीमत पर अदानी को पॉव पसारने नहीं देंगे चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न करने पड़े। ग्रामीणों का मिजाज देखने से तो लगता है अदानी को पुरूंगा कोल ब्लॉक की पर्यावरण जनसुनवाई करवाने के लिए लोहे का चना चबाना पड़ेगा?

धरमजयगढ़ का नगरीय क्षेत्र भी आयेगा कोल ब्लॉक के चपेट में

धरमजयगढ़ में डीबी पॉवर कंपनी द्वारा पूर्व में पर्यावरण जन सुनवाई करवाया था, कंपनी का सबसे अधिक विरोध इसलिए हुआ था कि नगरीय क्षेत्र भी डीबी पॉवर के कोल ब्लॉक में आ रहे थे, कोल ब्लॉक का विरोध देखते हुए कंपनी ने नगरीय क्षेत्र को छोड़ देने का शपथ पत्र दिया था। कि नगरीय क्षेत्र में कोयला उत्खनन नहीं करेंगे। धरमजयगढ़ के दो कोल ब्लॉक को मिलाकर एक कोल ब्लॉक बनाया गया। जिसकी नीलामी हुआ और केपीसीएल को आबंटन हुआ, मिली जानकारी अनुसार केपीसीएल द्वारा अपना कोल ब्लॉक एरिया को चिन्हांकित करने के लिए सीमेंट का खम्भा लगाया जा रहा है। केपीसीएल द्वार नगर पंचायत के वार्ड 1,2,3 एवं 5 में भी चिहंकित करने के लिए सीमेंट खम्भा लगाया है। नगरीय क्षेत्र के लोगों को ऐसा लग रहा था कि कोल ब्लॉक आने से इनका फायदा होगा नुकसान नहीं दुकानदारी बढ़ेगा, लेकिन नगरीय क्षेत्र के लोग ये जान ले कि केपीसीएल नगरीय क्षेत्र में भी कोयला खोदेगा। कोल ब्लॉक न आ सके इसके लिए डीवी पॉवर से भी अधिक विरोध कैसे में होगा इसके लिए नगरीय क्षेत्र के लोगों को ग्रामीणों के साथ मिलकर योजना बनाना चाहिए न की खुश होना।

विरोध में बाहरी लोगों को रखना होगा दूर

तीनों कोल ब्लॉक का खुलकर विरोध करना होगा ग्रामीणों को, प्रभावित ग्रामीणों को सबसे पहले उनको पहचाना होगा जो विरोध के नाम पर अपना रोटी सेकते हंै? सूनने को तो ताजूब लगता होगा लेकिन हकीकत है, बाहरी लोग सिर्फ अपना मोल बढ़ाने के लिए विरोध करते हैं और अपना उल्लू सीधा करने के बाद नौ दो ग्यारह हो जाते हैं, हर जन सुनवाई में देखने को मिलता है, कंपनी का विरोध करने वाले खुद अपने गांव में कोयला खदान आने से नहीं रोक पाये और लोग हमारे यहां आकर लंबा-लंबा कनूनी का पाठ पढ़ाते हैं, ऐसा लगता है कि कानून की पूरी जानकारी इन्हीं के पास है और ये लोग हमारे क्षेत्र में कोई कंपनी आने ही नहीं देंगे। लेकिन कंपनी का विरोध करने वाले बाहरी लोग सिर्फ मौका की तलाश करते हैं कि कब कंपनी वाले इनसे मिले बाकि आप लोग खुद समझदार हैं।

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