जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
भारत में विदेशी घुसपैठियों की पहचान हो इसके लिए एसआईआर करवाया गया है। एक-एक प्रदेश से लाखों-लाखों लोगों का वोटर लिस्ट से नाम कटा, जिसके कारण अवैध घूसपैंठियों को वापस अपना देश भागने को मजबूर होना पड़ रहा है। आप देख सकते हैं कि बंगाल में क्या हाल है, बंगलादेशी घूसपैठी भारत छोड़कर भाग रहे हैं। तो वहीं छत्तीसगढ़ में भी एसआईआर के तहत लगभग 25 लाख वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया। लेकिन विडंबना देखिए कि रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकास खण्ड में भी एसआईआर में अधिकारी-कर्मचारियों की मिली भगत से विदेशी नागरिकों का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ गया है। जबकि शासन ने नियम बनाया था कि 2003 के वोटर लिस्ट के अनुसार नाम जोड़ा जायेगा और जिनका नाम 2003 के वोटर लिस्ट में नहीं है वहा ऐसा सक्षय देगा जिससे पूरूप हो कि वह नागरिक भारतीय है, अगर कोई ऐसा नहीं कर पाते हैं उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जायेगा।
बाप का नाम जूड़ा, लेकिन बेटे का नाम काटा गया
धरमजयगढ़ क्षेत्र में ऐसा मामला भी देखने को मिल रहा है जिसमें कि अवैध घूसपैंठ कर निवास करने वालों का एसआईआर से कोई फ्रर्क नहीं पड़ा। हां एक बात तो साफ है कि एसआईआर करने वालों ने बाप का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया, लेकिन बेटे का नाम वोटर लिस्ट से हाटा दिया गया ये बोलते हुए की आप 2003 का प्रमाण दो। अब आप ही सोच सकते हैं कि धरमजयगढ़ में एसआईआर में कितना झोलझाल हुआ है। जब बाप का नाम जूड़ गया वोटर लिस्ट में तो फिर बेटे का नाम किस आधार पर लिस्ट से काटा गया यहा जांच का विषय है। धरमजयगढ़ में आपको यहा भी देखने को मिलेगा कि बिना नागरिकता के विदेशी लड़की से शादी कर लिया गया है और एसआईआर में उनका भी नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया जबकि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटना ही था। पर उनका नाम किस आधर पर वोटर लिस्ट में जोड़ा गया यहा तो धरमजयगढ़ के अधिकारी ही बता पायेंगे। इस मामले की अगर सही जांच हो तो ऐसे कई चौकाने वाले मामले देखने को मिलेगा जिसमें भारत सरकार द्वारा एसआईआर को लेकर बनाये गये नियम की धरमजयगढ़ विकास खण्ड में खुलकर धज्जियां उड़ाई गई है।








