जोहार छत्तीसगढ-बेमेतरा।
जिले में डिब्बे में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के आदेश ने अब किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन डीजल नहीं मिलने से खेतों की जुताई और बुवाई पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ट्रैक्टर को पेट्रोल पम्प तक ले जाना पड़ेगा, तब ही डीजल मिलेगा, तो दूर-दराज गांवों के किसान क्या करें, कई गांव 10 से 15 किलोमीटर दूर हैं। किसान 3000 रुपये का डीजल डलवाकर भी लाएं तो रास्ते में ही काफी डीजल खर्च हो जाएगा। ऐसे में खेत की जुताई आखिर कैसे होगी। किसानों का कहना है कि प्रशासन का फैसला जमीनी हकीकत से दूर नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को ही परेशानी में डाल दिया गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिले के कई पेट्रोल पम्पों में टंकियां बंद रहती हैं और आम लोगों को समय पर डीजल-पेट्रोल नहीं मिल पाता। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेती के सीजन को देखते हुए किसानों को डिब्बे में सीमित मात्रा में डीजल देने की व्यवस्था की जाए, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसानों की मजबूरी कौन समझेगा और खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।








