Home छत्तीसगढ़ मिली भगत और संरक्षण में चल रहा पूरा खेल!… पावर कंपनिया इतनी पावरफुल...

मिली भगत और संरक्षण में चल रहा पूरा खेल!… पावर कंपनिया इतनी पावरफुल की कार्यवाही करने में अधिकारियों के हाथ पैर थरथरा रहे!

53
0

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भालूपखना में निर्माणधीन लघु जल विद्युत परियोजना 8 मेगावाट शुरू से अपनी भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। बताया जाता है कि अपने पावर का पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर ये पावर कंपनी वन मंडल में अवैधानिक ढंग से कार्यों को बिना गैर वानिकी प्रयोजन किए अपना स्ट्रक्चर खड़ा कर दी है। सिर्फ इतना ही नहीं शासकीय खसरा नंबर 365 में निर्माण भी पूर्ण हो चुका है। वही ताजा मामला बाकारुमा परिक्षेत्र के अंतर्गत चरखापारा से भालूपखना जा रही विद्युत लाइन से जुड़ा है। जिसमें भी वन अधिनियमों के उलंघन की खबरें आ रही है। मिल रही जानकारी अनुसार बिजली विभाग द्वारा जंगल के अंदर विद्युत पोल गाडऩे की अनुमति ली गई है। जो चरखापारा से होते हुए भालू पखना की और है। जिसे विद्युत लाइन विस्तार के संबंध में बताया जा रहा है। मगर जब इस संबंध में विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों से बात की गई तो उनका स्पष्ट कहना है यह कार्य को संबंधित धनबादा पावर द्वारा करवाया जा रहा है। जहां 13 मीटर के खंभे पर 8 मीटर में 11 केवी और उसके ऊपर 33 केवी का विद्युत तार लगाया जाएगा। इस पूरे परियोजना में संबंधितों द्वारा दिए गए परमिशन और किये जा रहे कार्य में बड़े पैमाने पर वन अधिनियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही है। इस विषय में जब वनमंडला अधिकारी धरमजयगढ़ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग से प्राप्त आवेदन के आधार पर उन्हें कार्य करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं दूसरी तरफ विद्युत विभाग के अधिकारी ने स्पष्ट किया की आवेदन तो उनकी तरफ से दिया गया है मगर उक्त कार्य धनबादा पावर द्वारा करवाए जा रहे हैं। जब उक्त कार्य बिजली विभाग के है तो क्या शासन स्तर से उक्त कार्य करने के लिए राशि जारी की है? क्या ठेकेदार को विद्युत विभाग से कार्य का वर्क आदेश जारी किया गया है? या फिर बिजली विभाग और धनवादा कंपनी के मिली भगत से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है। और यदि ऐसा नहीं किया गया है तो क्या वन अधिनियमों के तहत वन मंडला अधिकारी संबंधित ठेकेदार और धनबाद पावर के खिलाफ कोई कार्यवाही करेंगे या उन्हें अभय दान दिया जाएगा? धनबादा पावर के इस लाइन को लेकर पहले से भी कई आपत्तियां है। विद्युत लाइन विस्तार को लेकर एक स्थानीय युवक द्वारा आवेदन धनवादा के खिलाफ शिकायत किया गया था, और रोक लगाई जाने की बात की गई थी।

वन विभाग को धोखे में रखकर धनवादा कर रहा वन भूमि में कार्य

जब धनवादा कंपनी को वन विभाग से बिजली पोल लगाने की अनुमति नहीं मिला तो कंपनी वालों एक शातिर दीमक लगाकर बिजली विभाग से वन भूमि पर पोल लगाने की अनुमति के लिए आवेदन लगवा दिया। वन विभाग ने बिजली विभाग का पूराना बिजली पोल बदलने की अनुमति दे दिया। लेकिन चालक धनवादा कंपनी ने बिजली विभाग की अनुमति पर अपना पोल लगाना शुरू कर दिया। जबकि धनवादा कंपनी के बिजली पोल लगाने का अलग से अनुमति लेने की जरूरत था। कंपनी वालों ने ऐसा करके वन अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते अपना काम चालू रखा है। और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को सब मालूम होने के बाद भी धनबादा पावर के सामने नत मस्तक हो रखो हैं?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here