जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
हरियाली से आच्छादित रहने वाले धरमजयगढ़ वनमंडल के बोरो परिक्षेत्र में इन दिनों जंगल की शांति को अवैध गतिविधियों की गूंज ने भंग कर दिया है। हम आपको बता दे कि ग्राम नेवार, बोरो और संगरा के वन क्षेत्रों में बीते दिनों जो दृश्य उभरकर सामने आए, वे न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि वन सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं। वहीं वनों की अवैध कटाई, जेसीबी मशीनों के जरिए खेतों का नवनिर्माण और कोयला खनन यह सब मानो यहां सामान्य गतिविधि बन चुकी है। हाल ही में कोयला खनन के खिलाफ कार्यवाही करते हुए चेन माउंटेन मशीन को जब्त किया गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद अवैध कोयले से भरी एक ट्रैक्टर की जब्ती ने इस पूरे नेटवर्क की गहराई को उजागर कर दिया।
वन विभाग की लापरवाही से एक गरीब ग्रामीण की मौत?
इसी कड़ी में अब एक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां पर अवैध पत्थर से भरी ट्रैक्टर के पलटने से एक आदिवासी ग्रामीण की जान चली गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस अवैध तंत्र की भयावह परिणति है, जो लगातार जंगल की गोद में पनप रहा है। घटना घटने के बाद पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर लिया है, लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़ा है। वन विभाग के जमीनी कर्मचारियों की लापरवाही से एक गरीब ग्रामीण की पत्थर से दबकर मौत हो गई है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां आखिर कैसे संचालित हो रही हैं? क्या वन विभाग के संबंधित अधिकारी और बीट गार्ड इस पूरे खेल से अनजान है, या फिर कहीं न कहीं उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है? लगातार सामने आ रही घटनाएं इस ओर इशारा करती है कि बिना किसी आंतरिक सहयोग के इस स्तर का अवैध कारोबार संभव नहीं। बहरहाल वनों की सुरक्षा का दायित्व जिन कंधों पर है, यदि वही कंधे बोझिल हो जाएं, तो जंगलों का भविष्य अंधकारमय हो जाता रहा है।
चल रहा टै्रक्टर चालक बदलने का खेल?
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार अवैध पत्थर को लाने वाला ट्रैक्टर चालक के पास किसी प्रकार का कोई लाईसेंस नहीं होने के कारण चालक बदलने का खेल खेला जा रहा है। अब देखना है कि कितना सफल हो पाते हैं ये लोगा।



