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धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित हो रहे लइका घर में नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार, खिचड़ी में नहीं रहता सब्जी

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा अपने पार्टनर संगठनों के साथ मिलकर लईका घर संचालित किया जा रहा है। लइका घर संचलित करने का उद्देश है कि गांव की काम काजी महिलाओं के बच्चों का देखभाल के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी मिल सके। इन लइका घरों में बच्चों की देखभाल और उन्हें संभालने का कार्य केअर-गिवर्स करते हैं। इन केअर-गिवर्स के कामों को दिशा-निर्देश करने का काम सुपरवाइजर द्वारा किया जाता है। धरमजयगढ़ विकास खण्ड में भी अजीम प्रेमजी द्वारा अपने पार्टनर संगठन पारस के साथ मिलकर लइका घर संचालित किया जा रहा है। आज हम एक ऐसा लइका घर की बात करने जा रहे हैं जहां पौष्टिक आहार के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जाता है नन्हें-मुन्ने बच्चों को? हमारी टीम पारेमेर पंचायत के फिटिंगपारा में संचालित लइका घर में बच्चों को किस तरह पालन-पोषण किया जा रहा है इसका जायजा लेने जाने पर देखा गया कि गांव के कई महिला अपने बच्चों को लेकर लइका घर आये हुए हैं। लइका घर के केअर-गिवर्स के साथ उनका सुपरवाइजर भी मौजूद है, सुपरवाइजर को बच्चों किस तरह पालन पोषण करते हैं इसके बार में पूछा गया तो उन्होंने बच्चों को मिलने वाली सुविधा के बारे में विस्तार से जानकारी देने लगे, हमारे द्वारा पूछा गया क्या आज कोई बच्चें आये हैं कि नहीं? तब उन्होंने बताया कि चलिए सर आप लोगों को दिखाता हूं, अभी बच्चों को खाना दिया गया है। लइका घर के पीछे आंगन में कई बच्चे खेलते तो कई बच्चे अपनी मां के गोद थे। सुपरवाइजर ने बताया कि हमारे केअर-गिवर्स बच्चों का ख्याल रखते हैं बच्चे को अगर नींद आ जाये तो इस विस्तर में सुलाते हैं। देख गया कि लइका घर में बच्चों को सोने के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है नीचे चटाई में विस्तर बना कर सुलाते हैं।

लइका घर का उद्देश्य

लइका घर कार्यक्रम का लक्ष्य कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना, बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना है। शारीरिक और मानसिक विकास यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिले जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिले। स्थानीय अनाज और खाद्य पदार्थों को शामिल करके पोषण को स्थानीय और सुलभ बनाया जाता है।

यह कैसे काम करता है

लइका घर बच्चों को दिन में कई बार भोजन और गतिविधियां प्रदान करना है, जिससे माताएं अपने काम (जैसे खेत या मजदूरी) पर जा सकें और बच्चों को घर पर अकेले न छोडऩा पड़े। बच्चों के वजन और ऊंचाई की नियमित निगरानी करना होता है।

विड़बना देखिए, पौष्टिक आहार के नाम पर कुछ नहीं?

सुपरवाइजर ने बताया कि लइका का पारस संगठन द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसका फंडिंग अजीम प्रेमजी द्वारा किया जाता है। हमारे टीम ने देखा कि लइका घर के पीछे आंगन में किसी भी प्रकार का कोई बैंठने का सुविधा नहीं मिट्टी में बच्चों को बैंठाकर खाना खिलाया जा रहा था, और छोटे-छोटे बच्चों को खिचड़ी के नाम पर सिर्फ दाल चावल को एक साथ पकाकर दिया गया था, इसमें पौष्टिक नाम का कोई भी सब्जी नहीं मिलाया गया था, आप चित्र में देख सकते हैं खिचड़ी में सब्जी तो दिखाई नहीं दे रहा है पर पौष्टिक खिचड़ी में मक्खी जरूर दिखाई दे रहा है।

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जब सुपरवाइजर से पूछा गया कि खिचड़ी में क्या क्या मिलाया जाता है तब उन्होंने बोला कि इसमें सब्जी भी मिलाया गया है, हम तो बच्चों को अंडा भी देते हैं, खिचड़ी थोड़ा ज्यदा पक गया है इसलिए सब्जी दिखाई नहीं दे रहा है देखिए न टमाटर दिखाई दे रहा है। हम आपको बता दे कि अजीम पे्रमजी फउंडेशन द्वारा संचालित लइका घर फिटिंगपारा में पौष्टिक आहार के नाम पर बच्चों को कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। जब सुपरवाइजर से पूछा गया आपके लइका घर में हरा सब्जी कहां हैं तो बताया कि आज ही खत्म हो गया है, इसका मतलब आप समझ सकते हैं कि लइका घर में पौष्टिक आहार नाम पर क्या खिलाया जा रहा है।

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