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बच्चों के जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे शिक्षक, स्कूल खोल कर स्कूल से गायब रहते शिक्षक, शिक्षा अधिकारी का भय नहीं

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

सरकार शिक्षा में सुधार हो इसके लिए हर प्रकार के कार्य कर रहे हैं लेकिन सरकार के नियम कायदे को दरकिनार कर शिक्षा व्यावस्था को चकना चूर कर रहे हैं शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षक। हम बात कर रहे हैं पारेमेर गांव के प्राथमिक शाला का इस स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ हैं प्रधानपाठक अजित तिग्गा और दुजराम सुमन, प्रधानपाठक स्कूल जाते ही नहीं है और सुमन शिक्षक हर दिन मध्यान भोजन के बाद मीडिल स्कूल चले जाते हैं। और स्कूली बच्चे खेत सड़क में घूमते रहते हैं। मध्यान भोजन में हर दिन सिर्फ चावल, दाल और आलु दिया जाता है शासन का मीनू कोई काम का नहीं है। स्कूल भवन जर्जर होने के कारण सभी बच्चों को अतिरिक्त भवन में बैठाया जा रहा है। पारेमेर में पदस्थ शिक्षक को कोई जिम्मेदारी नहीं है कि स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर चले जाने से बच्चों के साथ कभी भी कोई अनहोनी घटना घट सकता है। हमारी टीम को ये समझ नहीं आया कि हर दिन स्कूल छोड़कर मीडिल स्कूल में शिक्षक जाते क्यों हंै? हमारी टीम जब मीडिल स्कूल जाकर सुमन सर के बारे में पूछने पर मीडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षकों ने बताया कि यहां तो नहीं आया है स्कूल में ही होंगे। लेकिन थोड़ी ही देर में शिक्षक दुजराम सुमन मीडिल स्कूल के कमरे से निकल आये तब हमारे द्वारा पूछा गया कि ये कौन सर है तो उन्होंने बताया कि यही है सुमन सर अब आप समझ सकते हैं कि दोनों स्कूल के शिक्षकों में कितना ताल मेलकर बच्चों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

40-45 किलोमीटर दूर से करते है शिक्षक आना जाना

शासन के नियम अनुसर सरकारी हर कर्मचारी को मुख्यालय में रहना होता है लेकिन धरमजयगढ़ शिक्षा विभाग तो अपना नियम बना लिया है कि शिक्षकों को मुख्यालय में रहना ही नहीं है और मन चाहे तो स्कूल जाना है नहीं तो घर में बैंठकर वेतना लेना है। शिक्षा विभाग के हर अधिकारी को मालूम है कि इनके कौन सा शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं इसके बाद भी इनका वेतन हर माह सही समय में मिल जाता है। अब आप समझ सकते हैं कि 40-50 किलोमीटर से रोज आना जाना किया जा सकता है क्या? अगर जाते होंगे तो बच्चों को क्या पढ़ाते होंगे। स्कूल जाओ हस्ताक्षर करो और चले आओ इसके शिवा और कुछ नहीं, पता नहीं शिक्षा अधिकारी ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कार्यवाही क्यों नहीं करते? ये तो शिक्षा अधिकारी ही बता सकते हैं।

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