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धरमजयगढ़ के पीडीएस राशन दुकानों में क्या है शॉर्टेज का खेल?… आखिर प्रशासन के हाथ पांव क्यों फूलते कार्यवाही करने?

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक खाद्यान्न योजना का रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में बहुत ही बुरा हाल है। गरीबों को मिलने वाला राशन भी नसीब नहीं होता यहां, मशीन पर अंगूठे लगा लिए जाते हैं, और राशन के लिए गरीब ठोकरे खाता रहता है।

अतिरिक्त आवंटन के नाम से हुआ बड़ा खेल, खाद्य विभाग की भूमिका संदेह के दायरे में

सूत्रों से मिल जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से अतिरिक्त आवंटन के नाम पर भी बहुत बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें धरमजयगढ़ में पूर्व पदस्थ एक अधिकारी की विभागीय जांच भी चल रही है। वही इस अतिरिक्त आवंटन की भरपाई आज तक यहां नहीं हो पा रही है, दुकानदार कई आ रहे हैं और जा रहे हैं मगर शॉर्टेज आज भी बना हुआ है जो कहीं ना कही इस पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। खाद्य विभाग के संबंधित अधिकारी भी खाना पूर्ति करते दिखाई दे रहे हैं, सिर्फ नोटिस का खेल खेला जा रहा है। वही दुकानदार को भी मानो खुली छूट दी गई हो ऐसा करने को, आखिर विभाग कर क्या रहा है? कुछ दिन पहले गोलाबुड़ा के सरपंच ने बताया की पिछले दुकानदार द्वारा जो शॉर्टेज मिला है उसकी भरपाई करने के लिए ग्रामीणों से अंगूठा लगवा कर उसकी भरपाई किया जा रहा है। इतना ही नहीं बच्चों के स्कूलों में बटने वाले मध्यान भोजन के चावल को भी नरकालो के राशन दुकानदार खा बैठे हैं। वहीं विभाग इन सभी को नजर अंदाज करते हुए मीडिया की सुर्खियों के बाद भी कार्यवाही करने में हाथ पांव फूल रहे हैं यह समझ से परेह हैं!

हितग्राहियों से पहले अंगूठा लगवाया जाता है बाद में कई महीने तक राशन नहीं दिया जाता

राशन दुकानदारों की हौसला इतना बुलंद हो गया है कि इनको न तो खाद्य अधिकारी का डर है और न ही एसडीएम का ये लोग लगातार राशन घोटाला करता ही जा रहा है। हम आपको बता दे कि मिरिगुड़ा, विजयनगर, गोलाबुड़ा, नकना, पाराघाटी सही कई ऐसे क्षेत्र है जहां ग्रामीणों का अंगूठा तो लगवा लिया जा रहा है मगर राशन इन्हें नसीब भी नहीं हो रहा है, दुकानदार ही अपने पुराने शॉर्टेज को कभर करने में लगे हैं।

स्थानीय प्रशासन की नाकामयाबी या उन्हें संरक्षण?

विभाग द्वारा समय-समय पर दुकानदारों को नोटिस भी दिया जाता है मगर नोटिस कोई असर अभी तक होता नहीं दिखा है। आलम यह है कि दुकानों में शॉर्टज बढ़ता ही जा रहा है, और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैंठे हैं।

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