जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
छत्तीसगढ़ सरकार विकास को लेकर बड़ी-बड़ी बाते करते हैं, सरकार का विकास सिर्फ नगरों में दिखाई देते हैं, ग्रामीण क्षेत्र आज भी विकास से कोसो दूर नजर आ रहे हंै, ऐसा नहीं कि शासन ग्रामीण क्षेत्र का विकास के लिए राशि जारी नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए आये राशि का अधिकारी-कर्मचारी बंदरबांट कर ले रहे हैं? जिसका नतीजा है कि ग्रामीणों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है, और स्थानीय प्रशासन है कि जानकर भी अनजान बन बैंठे हैं। आज भी ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं जो मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। आज हम बात करने जा रहे हैं धरमजयगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पारेमेर का। पारेमेर पंचायत का आश्रित मुहल्ला कौआडाही एक ऐसा मुहल्ला है जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र निवास करते हैं, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा को आज भी उनका हक नहीं मिल रहा है। उनके हक पर अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि डाका डाल रहे हैं। पंचायत मुख्यालय से लगभग 5-6 किलोमीटर की दूरी पर बसा कौआडाही में 20-25 पहाड़ी कोरवा परिवार निवास करते हैं। उनके लिए शासन का योजना एक सपना बनकर रहा गया है शासन का कोई भी योजना का लाभ शायद ही इनको मिल रहा होगा? इनको मिलने वाला शासकीय लाभ कहां जा रहा है ये सबसे बड़ा सवाल है, इसकी जांच होनी चाहिए। आज के समय में भी सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा के लिए तरस रहे हैं। कौआडाही गांव के लोग आज के आधुनिक युग में भी नरकीय जिंदगी जी रहे हैं?
स्कूल भवन मरम्मत के नाम पर लाखों का गोलमाल, बोलने वाला कोई नहीं
शासन द्वारा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को अच्छी शिक्षा मिले, शिक्षा से कोई वंचित न रहे इसके लिए कौआडाही मुहल्ले में एक स्कूल का भी संचालन किया जा रहा है। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाला स्कूल भवन को भी भ्रष्टाचारियों ने नहीं बख्शा। सरकार जर्जर स्कूल भवन मरम्मत के लिए लाखों रूपये पंचायत को जारी किया था लेकिन पंचायत में बैंठे भ्रष्टाचारियों ने छोटे-छोटे बच्चों के जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर दिया, और स्थानीय प्रशासन है कि इन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्यवाही ही नहीं कर रहे हैं जिसका नतीजा है कि स्कूल मरम्मत के लिए आये राशि का बंदरबांट कर लिया है।
स्कूल भवन मरम्मत के नाम पर कुछ भी नहीं किया और 2 लाख 96 हजार 9 सौ 50 रूपये आहरण कर लिया। मजेदारबात है कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण स्कूल को आंगनबाड़ी में लगाया जा रहा है। कौआडाही स्कूल मेें शासन द्वारा दो शिक्षक पदस्थ किया गया है लेकिन एक शिक्षक तो धरमजयगढ़ में दिन बिताते हैं ग्रामीणों ने बताया कि एक ही शिक्षक स्कूल रोज आते हैं और जो शिक्षक धरमजयगढ़ में रहते हैं ओ कभी कभार ही स्कूल आते हैं। तो वहीं स्कूली बच्चों को दोपहर को मिलने वाला मध्यान भाजन भी नहीं मिल रहा है। शिक्षक से जब मध्यान भोजन की जानकारी लिया गया तो बताया कि स्कूल में दो माह से मध्यान भोजन नहीं दिया जा रहा है। क्योंकि सरपंच द्वारा मध्यान भोजन का चावल नहीं दिया गया है। अब आप सोच सकते हैं कि कितना बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है। स्कूल मरम्म्त के नाम पर राशि का गोलमाल करने की बात पर सरपंच ने बताया कि मैं इस कार्यकाल से पहले पंच था, कौआडाही स्कूल मरम्मत की राशि से स्कूल मरम्मत नहीं किया गया पंचायत भवन उसी राशि से किया गया है।

पगडंडी के साहरे पहुंचान होता कौआडाही
कौआडाही जाने के लिए शासन की ओर से कोई सड़क का निर्माण नहीं किया गया है। बरसात के दिनों में तो कौआडाही पहुंचना बहुत ही दिक्कत है कई कई दिनों तक ग्रामीण अपने घर नहीं जा पाते हैं। मुहल्ले जाने के लिए एक नाला पार करना होता है बरसात के दिनों में जब नाला भर जाता है तो ग्रामीण पानी कम होने का इंतजार करते हैं, पानी कम होने के बाद ही नाला पर करते हैं इसके लिए कई घंटों लोगों को नाले के पास बैठे रहना पड़ता है कई बार तो ग्रामीणों को रात भी नाला के इस पार बिताना पड़ता है। नाला पार करने के बाद भी कौआडाही पहुंचने के लिए कोई अच्छी सड़क नहीं है, लोगों को पगडंडी के साहरे ही कौआडाही पहुंचना होता है। हमारे जानप्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारियों को ये सब नहीं दिखता और अगर दिखता है तो फिर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं को उनका हक क्यों नहीं मिला?
कौआडाही वासियों को न मिल रहा शुद्ध पानी और न मिल रहा राशन
कौआडाही वासियों को शासन की कोई भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है बोलने पर कोई गलत नहीं होगा। क्योंकि कौआडाही में निवास करने वाले ग्रामीण आज भी शुद्ध पानी के लिए तरस रहा है और एक ढोडीनुमा कुआं का पानी पीने को मजबूर है, तो वहीं शासन से मिलने वाली राशन पर भी राशन माफियाओं ने डाका डाल रखा है, ग्रामीणों ने बताया कि राशन सरपंच बांटते हैं और सही तरीके से राशन नहीं मिलता है, एक माह का राशन तो किसी को दिया ही नहीं है। पारेमेर सरपंच छत्तरसिंह राठिया से जब राशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पुराना सरपंच घोटाला कर रखा है जिसके कारण एक माह का राशन ग्रामीणों को नहीं वितरण किया गया है पंचायत में बैंठक कर निर्णय लिया गया है पंचायत की राशि से चावल खरीद कर ग्रामीणों को वितरण किया जायेगा। तो वहीं मध्यान भोजन के चावल के बारे में पूछने पर सरपंच ने बताया कि गुरूजी चावल लेना आ नहीं रहे हैं तो हम क्या करें चावल हम थोड़ी न पहुंचाकर देंगे। अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं देने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही हो गया की नहीं जानना चाहते हैं कौआडाही के लोग?



