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एक गांव की कहानी:- भूखे पेट सोने को मजबूर ग्रामीण …ग्रामवासियों का नहीं जनप्रतिनिधि और पंचायत कर्मी का हो रहा विकास …कागजों में बोर खनन धरातल पर नहीं, स्वच्छ पानी को तरसता ग्रामीण

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकास खण्ड के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है, शासन द्वारा जारी विकास कार्य की राशि से ग्रामीणों का विकास नहीं जनप्रतिनिधि और पंचायत कर्मियों का विकास हो रहा है। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत गोलाबुड़ा में ग्रामीणों को शासन से मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसा नहीं कि शासन की ओर से ग्राम पंचायत को विकास कार्य के लिए राशि जारी नहीं हो रहा है। शासन ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा मिले इसके लिए भरपूर राशि ग्राम पंचायत को जारी कर रहे हैं लेकिन शासन से जारी राशि का बंदरबांट हो जा रहा है? ग्रामीण मूलभूत सुविधा के लिए आज भी तरस रहे हैं। गांव में मीडिया की टीम को देखते ही ग्रामीण एक जूट होने लगे और ग्राम पंचायत की र्दुदशा बताने लगे, ग्रामीणों ने सरपंच-सचिव पर कई गंभीर आरोप भी लगाये हैं।

तीन माह से नहीं मिल रहा ग्रामीणों को सही तरीके से राशन

ग्रामीणों ने बताया कि राशन बिक्रेता हितग्राहियों से अंगूठा तो लगवा लेते हैं लेकिन चावाल नहीं देते हैं विडंबना देखिए कि इसकी शिकायत करने पर खाद्य अधिकारी जांच तक करने नहीं जाते हैं। तीन माह से ग्रामीणों को राशन नहीं मिलने की जानकारी सरपंच अनिल टोप्पों देने पर उन्होंने बताया कि ये गलत बात है राशन तो बांट रहे हैं कभी कभार हो जाता है राशन बिक्रेता पहले मशीन में अंगुठा लगावा लेती है उसके बाद दुसरे तीसरे दिन राशन देती है। हमारे द्वारा फिर सरपंच से पूछा गया कि पहले क्यों अंगुठा लगवाती है राशन दुकानदार तब उन्होंने बताया कि पूर्व के राशन दुकानदार का रिकवरी है जिसके कारण ऐसा करना पड़ता है। और भी मजेदार बात है कि सरपंच अनिल टोप्पो द्वारा राशन बिक्रेता को फोन कर बताया गया कि लोग इंतजार कर रहे हैं तो फोन पे राशन बिक्रेता पूछती है कौन अंगुठा लगवाने वाले कि राशन लेने वाले तो सरपंच बोलते हैं कि दोनों है। अब आप सोच सकते हैं कि राशन माफियाओं का साथ गांव के सरपंच कैसे दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास के नाम पर ग्रामीणों के साथ मजाक

प्रधानमंत्री आवास के नाम पर रोजगार सहायक और अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा मिलकर खुलकार आवास में भ्रष्टाचार किया गया है। आवास मिलेगा बोलकर लोगों का कच्चा मकान को तो तोड़ दिया है, हितग्राहियों को आवास भी स्वीकृत हुआ पर आज तक आवास बना नहीं है, इस संबंध में ग्रामीणों से चर्चा करने पर बताया कि रोजगार सहायक आवास बना दूंगा बोलकर ठेका लिया था लेकिन पुरा पैसा निकल गया लेकिन आवास पूर नहीं हुआ है। रोजगार सहायक गुणासागर यादव के पास गोलाबुड़ा पंचायत के आलावा ग्राम पंचायत तालगांव का भी प्रभार है। रोजगार सहायक द्वारा फर्जी जिओ टैग कर राशि आहरण करने का मामला भी देखने को मिला, रोजगार सहायक अधूरा आवास को पूर्ण होना बताया गया है। लेकिन सबसे मजेदार बात है कि जनपद पंचायत में पदस्थ पीओ आखिर क्या करते हैं ये सिर्फ ऑफिस का कुर्सी तोडऩे का काम करते हैं?

जल जीवन मिशन के नल से नहीं निकलता जल

ग्रामवासियों को पीने के लिए शुद्ध जल मिले इसके लिए शासन ने जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर जल पहुंचाने के उद्देश्य से पाईप लाईन के माध्यम से नल कनेक्शन लगा दिया गया है लेकिन इनके नल से पानी नहीं निकल रहा है जल जीवन मिशन का नल ग्रामीणों के घर के सामने विभाग का शोभा बड़ा रहे हैं।

* अब देखना है कि ग्रामीणों की हक पर ढाका डालने वाले अधिकारी-कर्मचारी और पंचायत के ठेकेदारनुमा रोजगार सहायक एवं राशन बिक्रेता पर क्या कार्यवाही होता है, या फिर इन लोगों को ऐसा करने का खुली छुट जारी रहता है यह तो समय ही बतायेगा? अगर ग्राम पंचायत गोलाबुड़ा में हुए निर्माण कार्य की अगर सही तरीके से जांच की जाए तो बहुत बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा और कई लोग जेल की हवा खायेंगे।

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