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आखिर पुरूंगा कोयला खदान के खिलाफ आंदोलन की फंडिंग कहां से? -गोकुल नारायण यादव

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

आखिर पुरूंगा कोयला खदान के खिलाफ आंदोलन की फंडिंग कहां से हो रही है? बेनर पोस्टर और टेंट खाना और मिनरल्स वाटर और गाड़ी का खर्चा कौन उठा रहा है और कैसे? क्यों? पुरूंगा और सामरसिंघा के ग्रामीणजन अनजान, सवाल पूछना तो बनता है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष गोकुल नारायण यादन ने प्रेस के माध्यम से सावाल किया है कि वहां जाकर भाषण देने वाले क्षेत्रीय विधायक को छोड़कर जितने भी समाज सेवी और नेतृत्वकर्ता दिन रात लगे हुए हैं उनका कोई भी रोजगार और आय का स्रोत नहीं है लेकिन उनके कपड़े ब्रांडेड और चमकदार यह गांव वालों को बहुत जल्दी ही समझ में आने वाला है। गांव वालों को एकजुट होकर अपनी बात शत् प्रतिशत उपस्थिति के साथ जनसुनवाई में जैसा कि आज जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा रखना चाहिए और विरोध दर्ज कराया जाना चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि जनसुनवाई ही जनता की बात सुनने के लिए आयोजित किया जा रहा है इसलिए जनता अपनी बात वहां उपस्थित होकर रखें। आपको बता दें यह आंदोलन जीवी लोगों ने जनता को आंदोलन के नाम पर उलझा कर बड़े बड़े संस्थानों से फंडिंग लेकर भीड़ का फोटो वीडियो बनाकर दिल्ली भेज कर आंदोलन के नाम पर मोटी रकम प्राप्त करते हैं। यह लोग हवाई जहाज में यात्रा करते हैं महंगे-महंगे होटल में रूकते हैं। रायगढ़ से एक ऐसा ही आंदोलन कारी आता है जिसे आप सभी जनसुनवाई में विरोध प्रदर्शन करते हुए देख सकते इसे एक बड़ी संस्था से फंडिंग मिलता है उसी जितने भी बाहरी लोग यहां आ रहें हैं सभी को कहीं ना कहीं से फंडिंग हो रहा है। गांव वालों को समझना होगा यह अचानक गांव वालों के हितैषी बन कहा से आ रहे हैं। एक बार इनके बैंक खातों को खंगाला जाएं तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

निजी कंपनियों के खदानों के खिलाफ ही क्यों नेता और समाजसेवी होते हैं मुखर और विरोध कर करते हैं आंदोलन? क्या प्रायवेट कंपनी के खदानों से ही होता है पर्यावरण प्रदुषित? विधायक लालजीत के विधानसभा सभा क्षेत्र में पूर्व से चार चार बड़ी कोयला की खदानें संचालित है क्या उनके खिलाफ कभी धरना प्रदर्शन में शामिल हुए विधायक? क्या एस ई सी एल की चौथी सबसे बड़ी खदान जो छाल में उनके निवास स्थान के पास संचालित है उसे रोकने के लिए लालजीत ने विरोध किया? बरौद जामपाली जैसी ओपन कास्ट खदानें जो विधायक लालजीत के विधानसभा क्षेत्र में संचालित है उन क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में कभी विधायक ने जाकर उनके दु:ख दर्द को समझा या फिर उन्हें खदानों के प्रदुषण के बारे में समझाया? इन सभी प्रश्नों का जवाब नहीं ही मिलेगा, क्योंकि इन सभी खदानों को अनुमति कांग्रेस के कार्यकाल में ही दिया गया है और विधायक लालजीत राठिया और इसके पहले पूर्व विधायक और मंत्री स्व. चनेशराम राठिया के समय ही छाल और बरौद की खदानें खोली गई और तात्कालिन विधायक और वर्तमान विधायक ने विकास के कसीदे पढ़े। अब चूंकि विधायक लालजीत सत्ता से बाहर है और क्योंकि वर्तमान जो विरोध प्रदर्शन का दिखावा किया जा रहा है वो सिर्फ नीजि कंपनी होने के कारण ताकि कंपनियों का विरोध दर्ज कर जनता की सहानुभूति प्राप्त किया जा सके। मैं विधायक लालजीत से पूछना चाहता हूं कि वो सड़क पानी बिजली को लेकर क्या कभी धरना प्रदर्शन करने रायगढ़ जिला कार्यालय का घेराव किए हैं और नहीं तो क्यों? क्या विधायक लालजीत राठिया पूर्व में डी बी पावर और बालको कंपनी के जनसुनवाई में विरोध प्रदर्शन करने धरमजयगढ़ पहुंचे? विधायक धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनता सब समझती है अब जनता को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कीजिए अगले विधानसभा सभा चुनाव में वैसे भी आपका यह जो गढ़ समझते हैं वो तास की पत्तों की तरह ढहने वाला है।

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