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अखिर किसकी गलती से गई नाबालिग बच्ची की जान, स्वास्थ्य विभाग, मितानिन और महिला बाल विकास कहां सो रहे थे?

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ के वार्ड क्रमांक 11 से एक दुखद घटना समाने आया है, एक 15 वर्षींय नाबालिक बालिका को अपने प्रेम जाल में फसाकर झारखण्ड निवासी सुमन यादव उसका दैहिक शोषण करता है और नाबालिग 5 माह का गर्भवती हो जाती है। इसकी जानकारी उसकी मां को होने पर उसकी मां नाबालिक को लेकर पुलिस थाना पहुंचती है और पुलिस को पूरी कहानी बताती है, थाना प्रभारी ने उनको बैठने
बोलते हैं और थाने में महलिा अधिकारी नहीं होने के कारण रायगढ़ से महिला अधिकारी को बुलाते हैं, लेकिन कुछ ही देर में पीडि़त पक्ष थाना से चले जाती है। थाने से आने के बाद पूरी कहानी मुहल्ले के लोगों को बताती है और लड़के पक्ष को भी फोन कर सूचना देती है और कहती है हम लोग थाना गये थे अगर लड़की को नहीं अपनाओगे तो थाना में रिपोर्ट करूंगी जिसके बाद आरोपी युवक के मां, नाना, नानी और स्वयं झारखण्ड से आकर एक सादा कागज में लिखा पढ़ी कर 27 अक्टूबर 2025 को लड़की को अपने साथ ले जाती है। और झारखण्ड ले जाकर 4 नवंबर 2025 को उसके बॉयफ्रेंड (पति) उसकी टांगी से हत्या कर देता है। हत्या की सूचना झारखण्ड पुलिस को लगते ही आरोपी बॉयफ्रेंड (पति) को गिरफ्तार कर लेता है। अब सवाल उठता है कि एक नाबालिग बालिका 5 माह का गर्भवति हो जाती है और वहां के मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग के एएनएम क्या करती है?

हत्या के गुनेगार कई, क्या होगी कार्यवाही?

इस कहानी में सबसे दुखद पहलू यह है कि नाबालिग होने की जानकारी होने के बाद भी मितानिन और मुहल्ले वासियों ने नाबालिग को छत्तीसगढ़ से बाहर एक हत्यारा को सौंप दिया जाता है, क्या यहा उचित है? सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नाबालिग का टीका भी मितानीन द्वारा लगवाया गया है, जब नाबालिग गर्भवति को टीका लगवाने लाया गया था तब स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी को क्या नहीं मालूम था कि लड़की नाबालिक है एवं उसकी शादी नहीं हुई है। अगर जानकारी थी तो फिर इसकी जानकारी पुलिस व महिला बाल विकास विभाग को क्यों नहीं दिया? और अगर दिया है तो ये विभाग इतनी लापरवाही क्यों किया? हम आपको बता दे कि नाबालिक को जिस सादे कागज में लिखकर सौपा गया था उसमें आरोपी युवक की ओर से 5 लोगों का हस्ताक्षर है सूनिता देवी मां, सादर यादव, करमु यादव नाना, सुखमानी यादव नानी और आरोपी युवक सुमन है, और वहीं लड़की पक्ष की ओर से गवाह के रूपये 5 लोगों ने उस कागज पर हस्ताक्षर किया है गायत्री कश्यप मितानिन, अरविन्द्र शर्मा, शिवपाल सिंग पावले, महबीर, शिल्पा सिंह और पूजा तिर्की लड़की की मां ने हस्ताक्षर किया है। क्या एक नाबालिग बालिका जो 5 माह की गर्भवति थी जानते हुए भी उसको इस तरह से एक सादा कागज में लिखकर देना गुनाह नहीं है? और अगर गुनाह है तो फिर क्या इन गुनाहगारों को उसकी सजा मिलेगी?

जिला बाल संरक्षण अधिकारी को सूचना देने के बाद नहीं हुई रेस्कू

नाबालिग गर्भवति बालिका की पूरी जानकारी जिला बाल संरक्षण अधिकारी रायगढ़ को 29 अक्टूबर 2025 को दिया गया था सपोर्ट पर्सन भूपेन्द्र सिंह चौहान द्वारा। जिला बाल संरक्षण अधिकारी को जानकारी देने के बाद भी कि नाबालिग बालिका का रेस्कू के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, अगर जिला बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा इस मामले को संज्ञान में लेते और नाबालिग का रेस्कू होता तो आज जिंदा होती?

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