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एसईसीएल के खिलाफ बंग समाज स्वयं लड़ेगी अपनी लड़ाई, तथाकथित समाज सेवियों के भरोसे में नहीं

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ विकासखण्ड में कई कोल ब्लॉक खुलने वाला है, कई कंपनियों ने अपना ऑफिस भी शुरू कर दिया है। धरमजयगढ़ में सबसे पहले एसईसीएल का कोल ब्लॉक चालू होने की संभावना है, एसईसीएल के कोल ब्लॉक से गांव एवं शहर का कई वार्ड प्रभावित होंगे। छ.ग. बंग समाज एसईसीएल के खिलाफ आज एक विशाल रैली निकल कर एसडीएम धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपेंगे। बंग समाज पहले भी अपनी लड़ाई स्वयं लड़े है और सफल भी हुए हैं। बंग समाज ने प्रभावित ग्राव व वार्ड वासियों से अपील की है कि आज शाम 4 बजे एसडीएम कार्यालय पहुंचे, छ.ग. बंग समाज ने प्रभावित ग्रामीण, एसईसीएल प्रबंधन एवं प्रशासन के मध्यम सहमति नहीं बनने के कारण प्रभावित भूमि का खसरा / रकबा एवं वृक्ष परिसंपत्ति इत्यादि का सर्वे कार्य किसी भी पस्थिति में कराये जाने हेतु भू-अर्जन अधिकारी द्वारा आदेश परित ना किया जावे। पूर्व में सभी प्रभावित पंचायतों द्वारा ग्राम सभा के माध्यम से प्रस्तावित कोयला खनन के विरोध में प्रस्ताव पारित कर शासन-प्रसाशान को अवगत कराया गया है। प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना के प्रभावित क्षेत्र अधिसूचित क्षेत्र है जहां पेशा कानून लागू है इसलिए खनन परियोजना सम्भव ही नहीं है। तथा एस.ई.सी.एल प्रबंधन हमेशा प्रभावित किसानों को गुमराह करने का काम कर रहा है। कई बार बैठकें होने के बावजूद किसी प्रकार का सहमति नहीं बन पाया है। और ना ही बनेगा। ऐसी स्थिति में सर्वे का कार्य कराना न्याय सगंत नहीं होगा। ग्रामीणों ने निवेदन है कि एस.ई.सी.एल की प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना में प्रभावित ग्रामवासी एस.ई.सी.एल प्रबंधन एवं प्रसाशान के मध्य सहमति नहीं बनने के कारण प्रभावित भूमि का खसरा / रकबा एवं वृक्ष परिसंपत्ति इत्यादि का सर्वे एवं ड्रोन सर्वे का कार्य नहीं कराये जाने की कृपा करें।

पुरूंगा की तरह नहीं लड़ेंगे एसईसीएल प्रभावित ग्रामीण

धरमजयगढ़ के पुरूंगा में कोल ब्लॉक नहीं खोलने देने की लड़ाई प्रभावित गांव के ग्रामीण खूब लड़ रहे हैं लेकिन इनकी लड़ाई तब सफल होगा जब स्वयं भू समाज सेवी को ग्रामीणों की लड़ाई से दूर रखेंगे। क्योंकि कई समाज सेवी जो विरोध का झंडा उठा रखा है उनमें से कई लोग दिन में पुरूंगा में ग्रामीणों के साथ हल्ला बोलते हैं और शाम को कंपनी के ऑफिस में हाजरी देते हैं, अगर हमारी बात में यकीन ना हो तो अड़ानी कंपनी धरमजयगढ़ ऑफिस की सीसी टीवी फुटेज चेक कर ले। ये बाहरी लोग जो प्रभावित गांव से नहीं है ये सिर्फ ग्रामीणों के साथ देकर अपना जेब भरने की तैयारी में है। एसईसीएल के कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामीणों को पहले से ही मालूम है कि ये विरोधी लोग क्या करते हैं। वेदांता का जनसुनवाई के बाद एक समाज सेवी मोटरसायकल से कोरबा पहुंच कर बिंद के ऑफिस में पैसे के लिए हर दो-चार दिन में हाजरी लगाते थे अगर मेरी बातों में किसी को विश्वास न हो तो धरमजयगढ़ में केके बिंद का मोबाईल नंबर बहुत लोगों के पास फोन लगाकर पूंछ सकते हैं, आपको सच मालूम हो जायेगा। इसलिए बंग समाज एवं कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामीण अपनी लड़ाई स्वयं लड़ेंगे इन दलालनुमा लोगों के भरोसे में नहीं? वेदांता की जन सुनवाई से पहले माईक लेकर बड़े-बड़े भाषण झाडऩे वाले कई नेता समाज से आंदोलनकारियों के लेटर पेड मेरे पास उपलब्ध है जो वेदांता का कोल ब्लॉक खोलने का सहमति दिया था। इसलिए ऐसे दलालनुमा लोगों से पुरूंगा वासियों को दूर रहने की जरूरत है। कुछ दलालनुमा लोग मेरे उपर आरोप लगा रहे हैं कि ये पुरूंगा कोल ब्लॉक के बारे में कुछ नहीं लिख रहा है ये कंपनी वालों का साथ दे रहा है, मैंने किसी भी कोल ब्लॉक का समर्थन नहीं कर रहा हूं मैं ग्रामीणों का इन स्वयंभू समाज सेवी, कंपनियों का दलालों से सावधान रहने को बोल रहा हूं। इनकी पिछले कई सालों का रिकार्ड देख ले ये लोग क्या कर रहे हैं कितने कोल ब्लॉक खुलने से रोका है? ये लोग अपने घर गांव तो बचा नहीं पाया और आ रहे है पुरूंगा वालों को बचाने, बस मैं इनकी सच्चाई बता रहा हूं और इनको मिर्ची लग रहा है, शोसल मीडिया में उल्टा पुल्टा पोस्ट कर रहे हैं।

डीबी पॉवर की जन सुनवाई में नहीं आने दिया गया था बहारी लोगों

2011 में मेडरमार में डीबी पॉवर की जन सुनवाई प्रशासन द्वारा करवाया गया था, उससे पहले वेदांता का जन सुनवाई तराईमार में हुआ था धरमजयगढ़ की जनता जन सुनवाई क्या होता है इससे पहले नहीं जानते थे, लेकिन इसके बाद भी वेदांता को लोहे का चना चबाना पड़ गया था बंग समाज के विरोध के कारण, हां बंग समाज के साथ कुछ तथाकथित समाज सेवी, नेता और कंपनियों के दलालों का जुडऩे के कारण विरोध होने के बाद भी ये लोग अंदर ही अंदर समर्थन कर दिया था गांधी छाप के चक्कर में? वेदांता की जन सुनवाई के कुछ ही महिनों बाद डीबी पॉवर का जन सुनवाई होना था, कोल ब्लॉक के प्रभावित लोगों ने बैठक के उपर बैंठक कर गांव-गांव जाकर लोगों को समझाया कि विरोध सिर्फ प्रभावितों को करना है न की दलालनुमा बहारी लोगों के साथ मिलकर और हुआ भी वैसा मेडरमार गांव में डीबी पॉवर की जन सुनवाई हुआ और प्रभावित ग्रामीणों ने किसी भी कंपनी के दलाल एवं स्वयं भू-समाज सेवी को जन सुनवाई स्थल पर आने नहीं दिया था, रायगढ़ का एक धाकड़ युवा कांग्रेसी नेता जन सुनवाई स्थल पर 100-150 लोगों को लेकर जाने की जिद करने लगा, ग्राीमणों के आगे जिद करना नेता जी को भारी पड़ गया था, जूता चपल छोड़ जंगल की ओर भागना पड़ा था। अगर पुरूंगा वासियों को कंपनी कि खिलाफ लड़ाई लडऩा है तो वैसा ही करना होगा जैसे 2011 में डीबी पॉवर की जनसुनवाई में हुआ था। जन सुनवाई तक पुरूंगा में बाहरी और दलालनुमा लोगों की नो एंट्री का वोर्ड लगाना होगा और कड़ाई से इनको रोकना होगा। तब जाकर ग्रामीणों की लड़ाई सफल होगा नहीं तो वेदांत का उदाहरण तो दे ही दिया हूं वैसा ही होगा।

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