जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
बंग समाज को हल्के में न ले एसईसीएल और प्रशासन। बालको और डीबी पावर को नाकों चना चबा चुका है यह समुदाय। अपनी एक जुटता और जागरूकता के लिए जाना जाता है यह समुदाय। बंजर भूमि को उपजाऊ भूमि जो बना सकता है उस भूमि को बचाने के लिए हर स्तर तक भी जाने से पीछे नहीं हटेगा बंग समाज। बंग समाज ने इस बार ठाना है अपने ही समाज के चिन्हांकित दलालों को सबक सिखाना है। भारत विभाजन और बंगलादेश से युद्ध उपरांत वहां से शरणार्थियों को धरमजयगढ़ के आसपास तात्कालिक समय में शासन-प्रशासन द्वारा यहां 5 एकड़ और सात एकड़ भूमि देकर उन्हें बसाया गया था और उस समय इस भूमि पर सिर्फ पटसन की खेती होती थी क्योंकि जमीन अनुपजाऊ और रेतीली बंजर जमीन था लेकिन बंगाली समुदाय ने अपने पुरूषार्थ के बल पर इस अनुपजाऊ बंजर भूमि को खून पसीना बहा कर सोना उगलने वाला बना दिया और पीछले 15-20 वर्ष में कृषि के क्षेत्र में क्रांति ला कर संपन्न किसान बन गए और यह शांति अमन वाला बंग समुदाय यहां के मिट्टी समाज में घुल मिल गया। यहां के बंगाली किसानों ने रात-दिन मेहनत कर कृषि फसल उत्पादन में मिसाल कायम कर तरबूज खरबूजा उत्पादन में प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में अलग पहचान बना डाला। अब लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस समुदाय की नींद हराम हो गया है क्योंकि कोयला खदान नामक दानव इनके ऊपर आकर बैठने वाला है और इन्हें अपनी उपजाऊ भूमि छीनने का डर सता रहा है कि कहीं हम फिर भूमि हिन ना बन जाए। आज से 15 साल पहले भी बालको और डीबी कंपनी द्वारा इन्हें बेघर करने का प्रयास किया गया लेकिन इस समाज की एकता और एकजूटता के कारण कंपनियों को भागना पड़ा पर अब परिस्थितियां बदल चुकी है एसईसीएल द्वारा इनके भूमि और परिस्थितियों का आंकलन कर सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है यानी कुछ दिनों बाद मुआवजे का निर्धारण कर भूमि अधिग्रहण हेतु आदेश जारी कर दिया जायेगा जो यह समुदाय नहीं चाहता है लेकिन कुछ दलाल सक्रिय है जो यह सोचकर समुदाय के साथ दिखावा कर रहे हैं कि आंदोलन करते हैं और मुआवजा बढ़ाने में मैं न्यायालय तक ले जाउंगा ऐसे दलालों से समाज को सावधान रहना चाहिए। आपको बता दें ये दलाल लोग दिन में लोगों के साथ रहकर विरोधी की भूमिका निभाते हैं और शाम रात को कंपनी के दफ्तर में हाजरी लगाते हुए खर्चा पानी मांगते हैं। पूरा बंग समुदाय अब इन दलालों को सबक सिखाने तैयार है क्योंकि इन लोगों की पहचान हो चुकी है कि कैसे बालको कंपनी के बाद इन्होंने भारत माला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भी मुआवजा बढ़ाने के नाम पर और यहां तक कि डीबी पॉवर कंपनी के खदान में जो कुछ बंगाली किसानों की जमीन खरीदी गई थी उसे वापस दिलाने के नाम पर सौदा बाजी किया गया सब कुछ अब बंग समुदाय जान चुके हैं और इसलिए निर्णय लिया गया है कि अपनी लड़ाई यह समाज खूद लड़ेंगे और किसी भी स्थिति में शाहपुर दुर्गापुर कोयला खदान में अपनी जमीन नहीं देंगे।



