जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
छत्तीसगढ़ की उम्र 25 साल हो गया और सरकार 25 साल में प्रदेश वासियों को एक अच्छी सी सड़क नहीं दे पाया है। सुनने में अजीब लग रहा होगा लेकिन हकीकत यही है, छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक खराब सड़क रायगढ़ और जशपुर जिले में ही देखने को मिलता है। सड़क के लिए सड़क पर उतरने को कोई तैयार नहीं है। सब कोल ब्लॉक के लिए आंदोलन, बैठक, धरना प्रदर्शन करने को उतावले हैंं। हर दिन गांव-गांव जाकर विधायक एवं अपने आप को सामाज सेवी बोलने वाले बैठक कर रहे हैं, कोल ब्लॉक अपने क्षेत्र में नहीं आने देंगे बोलकर। हां एक जनप्रतिनिधि को करना भी चाहिए अपने जनता के लिए, सबसे मजेदार बात है कि ये जनप्रतिनिधि, नेता, सामाज सेवियों को सिर्फ कोल ब्लॉक, कारखाने के स्थापना पर ही आंदोलन करते दिखाई देते हैं, क्या जनता का और कोई मुद्दा नहीं है? ये लोग जनता के मूलभूत सुविधा के लिए कभी की सड़क में नहीं उतरते हैं, हम अगर सड़क की बात करें तो विधायक लालजीत सिंह राठिया के विधानसभा क्षेत्र के सड़कों का हाल बेहाल है, विधायक के गृह ग्राम का मुख्य सड़क का हाल तो ऐसा है मोनो सड़क कभी था ही नहीं, किसी को अगर पत्थलगांव जशपुर जाना हो तो सौ बार सोचते हैं कि जाये की न जाये, सड़क ऐसा है कि सड़क पर गाड़ी चलाना यानि अपने जान जोखिम में डालना, छाल से खरसिया और सिसरिंगा से पत्थलगांव तक की सड़क पूरी तरह खराब हो गया है लेकिन ये जनप्रतिनिधि और सामाजसेवी का ठप्पा लगा रखे जनताओं का हितैशियों को सड़क का हाल दिखाई नहीं देता है। इनको तो सिर्फ कौन सा क्षेत्र में कोल ब्लॉक शुरू होना है ये ही सर्च करते रहते है अपने मोबाईल में ताकि इनका रोजी रोटी चलता रहे? खराब सड़क के कारण छाल क्षेत्र में रोज सड़क दुर्घटना हो रहा है, खराब सड़क के कारण निर्दोष ग्रामीणों की जान जा रहे हैं हाथ पैर टूट रहे हैं ये सब इन स्वयंभू सामाज सेवी को कब दिखाई देखा?
खराब सड़क को लेकर क्यों नहीं करते आंदोलन?
कोल ब्लॉक की जन सुनवाई की खबर लगते ही, रोज का आंदोलन का रूप रेखा बनाने वाले नेता और समाजसेिवयों को खराब सड़क के लिए आंदोलन करने का समय क्यों नहीं मिलता है? क्या खराब सड़क जनता का कोई मुद्दा नहीं इनके लिए? क्या मुलभूत सुविधा दिलवाना विधायक राठिया का कोई जिम्मेदारी नहीं है? 5 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद विधायक अपने ही विधानसभा क्षेत्र का सड़क तक नहीं बनवा पाया, और अब विपक्ष में होने के बाद भी सड़क के लिए सड़क पर नहीं उतर रहे विधायक राठिया, हां एक बात तो साफ है कि विधायक अपना वोट बैंक खोना नहीं चाहते हैं इसके लिए कुछ तथाकथित समाज सेवियों के साथ हर दिन कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों के साथ दिखावे का आंदोलन, बैठक कर रहे हैं। हम इसलिए बोल रहे हैं कि विधायक जी दिखावे के लिए ग्रामीणों के साथ खड़ा है हकीकत ये है कि विधायक राठिया जिन समाज सेवी आंदोलनकारियों के साथ कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे हैं उनका पिछला रिकार्ड देखे अब तक कितने कोई ब्लॉक का विरोध करके खुलने नहीं दिये हैं। इनके क्षेत्र में ही सबसे अधिक कोल ब्लॉक संचालित है, ये लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए आंदोलन करते है अपना स्वार्थ पूरा होने के बाद चुप चाप ग्रामीणों के नजर से दूर हो जाते हैं। इन तथकथित समाज सेवियों को अगर इनता ही लोगों का चिंता होता तो सड़क के लिए सड़क पर जरूर उतरते, लेकिन इनको क्षेत्रवासियों के मुलभूत सुविधा का कोई चिंता नहीं है तो सिर्फ और सिर्फ अपना चिंता?
जनसुनवाई में ये लोग पर्यावरण को लेकर क्यों नहीं बोलते?
कोल ब्लॉक खुलने से पहले पर्यावरण जनसुनवाई होता है, ताकि क्षेत्रवासी पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस पर बात रखे जनसुनवाई में, जनसुनवाई में जितना अधिक पर्यावरण को लेकर विरोध दर्ज करवाया जायेगा उताना ही कोल ब्लॉक को खुलने में परेशानी होगी, लेकिन ये तथाकथित समाजसेवी पर्यावरण प्रेमी कभी में पर्यावरण जन सुनवाई में पर्यावरण पर बात नहीं करते हैं, ये लोग एक तरह से कंपनियों के एजेंट हुआ करते हैं जो कई दिनों से ग्रामीणों को गुमराह करते हुए जनसुनवाई को सफल बनाते हैं, ये लोग जनसुनवाई में ग्रामीणों को ऐसा बोलने पर मजबूर कर देते हैं जिससे पर्यावरण जनसुनवाई सफल हो जाते हैं, ग्रामीणों को पर्यावरण के बारे में कुछ नहीं समझाते हैं ये लोग ग्रामीणों को जमीन नहीं देंगे, नौकरी की मांग करेंने बोलने पर मजबूर करते हैं कि आप लोग जन सुनवाई में खुलकर सब एक साथ मिलकर जमीन नहीं देंगे बोलना है, जबकि जनसुनवाई इसलिए करवाया जाता है कि कोल ब्लॉक आने से पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा। ये कंपनी का एजेंट ग्रामीणों को गुमराह कर कंपनी का जनसुनवाई को सफल बनते हैं और अपना स्वार्थ पूरा करते हंै। इसलिए ग्रामीणों को इनके झांसे में नहीं आना है और अपनी बात स्वयं को रखना है जितना इन लोगों से दूर रहेंगे उतना ही फायदा होगा।



