जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
छत्तीसगढ़ सरकार लगातार शिक्षा को बेहतर बनाने और ब’चों के सर्वांगीण विकास के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाकर शिक्षकों को ट्रेनिंग के माध्यम से गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने की अपील करते हैं किंतु शिक्षकों की लापरवाही इस कदर बढ़ गई है कि शिक्षक मनमानी हो गए हैं आने और जाने का समय अवधि सुनिश्चित नहीं है। जिनके वजह से शिक्षा पूरी तरह बदहाल स्थिति में पड़ गई है आपको बता दूं कि प्रधान पाठक व सीएससी होने के बावजूद भी शिक्षा स्तर बेहद ही निचले पायदान पर जाते नजर आ रही है। पूरा मामला बेमेतरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाला शासकीय माध्यमिक व शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षकों कि मनमानी को लेकर ब’चे पालकों मे आक्रोशित नजर आये वही पदस्थ प्रधान पाठक व सीएसी विनोद पुरैना कई दिनों से स्कूल नहीं आते यह हमें ग्रामीणों ने बतलाई और कभी आते ही है तो समय से पहले चले जाते वही स्कूल में पदस्थ शिक्षक ने डाक देने के बहाने डाक छोड़कर चुम्मन लाल मारकंडेय समय से पहले अपने घर चले जाते हंै। वही पदस्त शिक्षक कुमार राम ध्रुव ने झूठ बोलने मे माहिर है और स्कूल के ब’चों को बढ़ाने के बजाय छुट्टी दे दिये जाते हैं और मीडिया जब मौके पर पहुंचते है तो बातों गोल मोल करने लग जाते हंै, और शासकीय प्रथमिक स्कूल के पदस्थ कोशले शिक्षक से जब पूछा जाता है तो कहा जाता है मेरे बाइक में आवाज आ रहा था मंै 6 किलोमीटर से आता हूं इसलिए समय में नहीं पहुंच पाता हूं समय का जब बात किये तो कहा &:40 बजे छुट्टी दिया हूं यह मामला बेमेतरा. जिला का है जहां शिक्षक कि आय दिन मनमानी देखने को मिलता है जहां स्कूल को छोड़कर अपने घर चले जाते हैं और समय से पहले स्कूल में ताला लगाकर छुट्टी दे दिया जाता है जिनका प्रभाव ब’चों का भविष्य और पढ़ाई में असर पड़ता है लेकिन ऐसे शिक्षकों की लापरवाही से शैक्षणिक कार्य में घोर अनियमितता बढ़ती जा रही है ऐसे शिक्षकों को आखिरकार किसका मिल रहा है संरक्षण कौन है जिम्मेदार?



