जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ विकास खण्ड में शिक्षा के नाम पर सिर्फ खिलवाड़ ही किया जा रहा है, स्कूल में पदस्थ शिक्षक अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। शिक्षक समय से पहले स्कूल बंद कर घर चले जा रहे हैं, तो कहीं स्कूल का आंगन ही स्विमिंग पुल बन जा रहा है, मध्यान्ह् भोजन के नाम पर बच्चों के थाली में कुछ नहीं मिल रहा है, बच्चों के थाली में पानी जैसा दाल और आलू के दो-चार टुकड़े ही नसीब में आ रहे हैं, जबकि शासन हर दिन बच्चों के लिए अलग-अलग मीनू के हिसाब से मध्यान्ह् भोजन देना होता है। मानो बच्चों के थाली से हरी सब्जी, आचार, पापड़ गायब ही हो गया है। आज हम बात करने जा रहे धरमजयगढ़ विकास खण्ड के चिड़ोडीह गांव का इस गांव में प्राथमिक शाला एवं पूर्व माध्यमिक शाला संचालन होता है। पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षक ने बताया कि स्कूल में छात्रों कर संख्या 30 तो वहीं प्राथमिक शाला की प्रधानपाठक मैडम से जानकारी मांगने पर किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इंकार कर दिया और बातये कि मैं कोई जानकारी नहीं दे सकती हूं। स्कूल की स्थिति देखने से ऐसा लगता है कि यह स्कूल नहीं कचरा रखने का घर है। मैडम जी तो अपने स्कूल की दर्ज संख्या तक नहीं बताई इतना घमंडी है मैडम जी, मीडिल स्कूल के शिक्षक से प्राथमिक शाला की प्रधानपाठक का नाम पूछने पर डर से नाम तक नहीं बताया बोलने लगा रहने दीजिए सर मेरे से मत पूछिए आप उनसे ही पूछ लीजिए उनका क्या नाम है। अब आप खुद सोच सकते हैं कि मैडम जी का नाम जब एक शिक्षक बताने में डर रहे हैं तो फिर स्कूल की छोटे-छोटे बच्चों में कितना डर पैदाकर रखी होगी यह सोचने की बात है।
बच्चों की थाली से पौष्टिक आहार गायब
चिड़ोडीह स्कूल के रसोई घर के दीवर पर एक मीनू चाट लगा रखे हैं उसके हिसाब शुक्रवार यानि आज के दिन मध्यान्ह् भोजन में बच्चों को दाल, आलू बड़ी की सब्जी और आचार देना था मगर मध्यान्ह् भोजन में बच्चों को दाल नहीं दाल के नाम पर पानी में नमक और हल्दी डालकर देने जैसा दाल, और सब्जी के नाम पर दो टुकड़े आलू ही दिखाई दे रहा था। बच्चों ने बताया कि हर दिन ऐसा ही खाना दिया जाता है, आचार और पापड़ कभी भी नहीं दिया जाता है।
बैंठकर नहीं घूम-घूमकर खाते हैं खाना
विड़बना देखिए स्कूल में बच्चों को संस्कार सीखाया जाता है कि कैसे खाना खाया जाता है, बड़ों से किस तरह का व्यवहार करना है, लेकिन इस स्कूल में तो संस्कार जैसे कोई बात ही दिखाई नहीं दे रहा है, छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को मध्यान्ह् भोजन खाने के लिए कोई संस्कार नहीं है, बच्चे खाना थाली में लेकर घूम-घूम कर आंगन में खाते हैं तो कई बच्चों को तो पत्थर के उपर बैंठकर खाते देखा गया है। इस संबंध में शिक्षक से पूछने पर बोला गया कि नहीं सर खाना बैठ कर ही खाते हैं आज ही बच्चे घूम घूमकर खा रहे हैं। अब आप खुद समझ सकते हैं कि शिक्षक के बात में कितना सच्चाई है।
क्या लापरवाह कर्मचारियों पर होगी कार्यवाही?
शिक्षा के मंदिर में इस प्र्रकार की लापरवाही की जांच होगा की नहीं ये सबसे बड़ा सवाल है, क्या अधिकारी बच्चों के थाली में शासन के नियमानुसर पौष्टिक आहार उपलब्ध करवायेंगे? शिक्षा की मंदिर को गंदगी की ढेर से छुटकार मिलेगा? ऐेसे कई सवाल लोगों द्वारा शिक्षा विभाग के अधिकारी से कर रहे हैं। अब देखना होगा की धरमजयगढ़ के नव पदस्थ खण्ड शिक्षा अधिकारी समाचार प्रकाशन के बाद संज्ञान में लेते है कि नहीं ये तो समय ही बताएगा।



