जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल परिसर में संचालित धनवंतरी दवा दुकान की बदहाल व्यवस्था शासन की सस्ती दवा उपलब्ध कराने की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। गरीबों, आदिवासियों और जरूरतमंद मरीजों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का लाभ यदि जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जिस दुकान से मरीजों को राहत मिलनी चाहिए, उसी के नियमित रूप से नहीं खुलने और दवाइयां उपलब्ध नहीं रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आम जनता को बाजार की तुलना में कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धनवंतरी दवा दुकान योजना शुरू की गई थी। इसी उद्देश्य से धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल के सामने भी धनवंतरी दवा दुकान खुलवाई गई, ताकि इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सस्ती दवाइयां आसानी से मिल सकें। बताया जाता है कि इस योजना के तहत दवाइयां 71 प्रतिशत तक कम दर पर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। लेकिन धरातल पर व्यवस्था की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दुकान खुलने की गारंटी नहीं, खुलने पर दवाइयों की उपलब्धता पर सवाल
स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों के अनुसार, धनवंतरी दवा दुकान नियमित रूप से नहीं खुलती। यदि दुकान खुल भी जाए, तो मरीजों को जरूरत की दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती। ऐसे में मरीजों को निराश होकर धनवंतरी दुकान संचालक के मेडिकल से या फिर दूसरी मेडिकल दुकानों से मंहगी दवा लेना पड़ता है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को जरूरी दवाइयां ही नहीं मिलेंगी, तो सस्ती दवा योजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिलेगा? गरीब परिवारों के लिए बीमारी का खर्च पहले ही आर्थिक बोझ बना रहता है। जांच, इलाज, आने-जाने और अन्य जरूरी खर्चों के बीच दवाइयों पर होने वाला खर्च भी उनकी जेब पर भारी पड़ता है। ऐसी स्थिति में सस्ती दवा दुकान का नियमित रूप से संचालित होना बेहद जरूरी है। लेकिन दुकान के संचालन में कथित अनियमितता और दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को यदि बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, तो योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता नजर आता है।
बीएमओ की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दुकान के संचालन में अनियमितता और दवाइयों की अनुपलब्धता की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जांच कर आवश्यक कार्यचवही करनी चाहिए।
सवाल यह है कि अस्पताल परिसर में संचालित दुकान की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही है? यदि जिम्मेदार अधिकारियों को दुकान की समस्याओं की जानकारी है, तो फिर व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? और यदि जानकारी नहीं है, तो यह निगरानी व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। संबंधित बीएमओ को मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराने की बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अस्पताल के सामने दुकान, फिर भी मरीजों को राहत क्यों नहीं?
मिली जानकारी के अनुसार, धनवंतरी दवा दुकान का संचालन सिविल अस्पताल के सामने स्थित मेडिकल दुकान के संचालक द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि दुकान के संचालन की जिम्मेदारी तय करने और नियमित निगरानी करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि योजना के तहत निर्धारित शर्तों के अनुरूप दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं या दुकान नियमित रूप से नहीं खुल रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। धनवंतरी योजना का उद्देश्य केवल दुकान खोल देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को निर्धारित रियायती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराना है। दुकान का संचालन किसके जिम्मे है, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि मरीजों को समय पर दवा मिले, जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रहे और दुकान निर्धारित समय पर खुले।
गरीब और आदिवासी मरीजों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होना चाहिए
धरमजयगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए सिविल अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और आदिवासी समुदाय के लोगों की भी बड़ी संख्या होती है। ऐसे मरीजों के लिए सस्ती दवाइयों की उपलब्धता महज सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक राहत का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि योजना के तहत दवाइयां उपलब्ध नहीं होंगी, दुकान समय पर नहीं खुलेगी और मरीजों को मजबूरी में दूसरी दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ेंगी, तो इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में केवल कागजों पर योजना संचालित होने से जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल सकता। जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी योजना में लापरवाही की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, न कि मरीज व्यवस्था की खामियों के कारण परेशान होते रहें।
प्रशासन से जांच और ठोस कार्यवाही की मांग
धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल की धनवंतरी दवा दुकान के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निम्न बिंदुओं पर तत्काल ध्यान देना चाहिए, दुकान के नियमित संचालन और निर्धारित समय पर खुलने की जांच कराई जाए। दवाइयों के स्टॉक और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की स्थिति का सत्यापन किया जाए। योजना के तहत निर्धारित रियायती दरों और अन्य शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की जाए। दुकान संचालक की जिम्मेदारी तय कर अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। बीएमओ और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जाए। अस्पताल आने वाले मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए नियमित निरीक्षण और शिकायत निवारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब जवाबदेही तय करने का समय
धनवंतरी दवा दुकान का उद्देश्य गरीबों को राहत देना है, न कि उन्हें दवाइयों के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकने के लिए मजबूर करना। यदि धरमजयगढ़ में दुकान के अनियमित संचालन और दवाइयों की अनुपलब्धता की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह केवल दुकान संचालन की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन और निगरानी से जुड़ा गंभीर मामला होगा। प्रशासन को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराए, जिम्मेदार पक्षों से जवाब मांगे और जरूरत पडऩे पर नियमानुसार सख्त कार्यवाही करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि धनवंतरी दवा दुकान नियमित रूप से खुले, जरूरी दवाइयां उपलब्ध रहें और मरीजों को निर्धारित रियायती दरों पर दवा मिले। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन मरीजों की इन समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और धरमजयगढ़ की धनवंतरी दवा दुकान की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।








