छत्तीसगढ़

कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों ने भरी हुंकार, हजारों की संख्या में महिला-पुरुषों ने निकाली महा रैली… एसईसीएल-केपीसीएल वापस जाओ के नारों से गूंजा धरमजयगढ़, एसडीएम कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित कोल ब्लॉकों को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब खुलकर सड़क पर आ गया है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के नाम पर ग्रामीणों ने कोयला खदानों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। 11 सितंबर को धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एकत्रित हुए और देखते ही देखते यह भीड़ एक विशाल जनआंदोलन का रूप लेती नजर आई। क्लब ग्राउंड से ग्रामीणों ने महा रैली निकाली। रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां ग्रामीणों ने कोल ब्लॉक के विरोध में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पूरा नगर एसईसीएल वापस जाओ, केपीसीएल वापस जाओ, जल-जंगल-जमीन हमारा है, इसकी रक्षा हम करेंगे, किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे, जैसे नारों से गूंजता रहा।

जमीन के मुद्दे पर ग्रामीणों का दो टूक ऐलान

कोल ब्लॉक को लेकर ग्रामीणों के बीच जबरदस्त आक्रोश दिखाई दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, पहचान और आने वाली पीढिय़ों का आधार है। जमीन चली गई तो सिर्फ खेत नहीं जाएंगे, बल्कि गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर अपनी जमीन को कोयला खनन के लिए देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर यदि जल, जंगल और जमीन ही छीन ली जाएगी तो ऐसा विकास ग्रामीणों को मंजूर नहीं है।

पहले भी कंपनियों के खिलाफ दिख चुका, ग्रामीणों का आक्रोश

धरमजयगढ़ क्षेत्र में कोयला परियोजनाओं को लेकर विरोध कोई नया नहीं है। ग्रामीण पहले भी डीबी पावर के खिलाफ मुखर आंदोलन कर चुके हैं। विरोध के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कंपनी कार्यालय में घुसकर तोडफ़ोड़ की घटना तक सामने आई थी। ऐसे में अब एसईसीएल और केपीसीएल से जुड़े प्रस्तावित कोल ब्लॉकों को लेकर जिस तरह ग्रामीण लामबंद हो रहे हैं, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों का भरोसा हासिल करना होगी। ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश, बिना ग्रामीणों की सहमति और उनके हितों को प्राथमिकता दिए क्षेत्र में किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

आंदोलन की आड़ में फायदा उठाने वालों पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल

महा रैली के दौरान कुछ ग्रामीणों ने आंदोलन की आड़ में कथित रूप से निजी स्वार्थ साधने वालों को लेकर भी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग अपने एनजीओ के पोस्टर और पंपलेट आंदोलन स्थल पर लगाकर उसकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या एनजीओ के निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि कोल ब्लॉक के खिलाफ और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए है। ऐसे लोगों को आंदोलन से अलग रखना जरूरी है, ताकि आंदोलन की मूल भावना कमजोर न हो और ग्रामीणों की आवाज किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल न की जा सके।

अभी तो अंगड़ाई है, लड़ाई बाकी है

महा रैली में ग्रामीणों के तेवरों से साफ दिखाई दिया कि यह विरोध केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित रहने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने संकेत दिया कि यदि कोल ब्लॉक की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि कोल कंपनी के खिलाफ अभी तो अंगड़ाई है, लड़ाई अभी बाकी है। आने वाले समय में क्षेत्र के और अधिक गांवों को जोड़कर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जल, जंगल और जमीन की कीमत पर कोयला खनन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि उनकी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई तो विरोध और तेज होगा।

धरमजयगढ़ में कोल ब्लॉक का विरोध अब केवल गांवों तक सीमित नहीं

11 सितंबर की रैली ने यह जरूर दिखा दिया कि कोल ब्लॉक का मुद्दा अब गांवों की चौपाल तक सीमित नहीं है। हजारों ग्रामीणों का सड़क पर उतरना प्रशासन और प्रस्तावित परियोजनाओं से जुड़े पक्षों के लिए एक बड़ा संदेश है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों और मांगों पर क्या कदम उठाता है तथा संबंधित कंपनियां स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान किस तरह करती हैं। फिलहाल ग्रामीणों के तेवर से इतना साफ है कि कोल ब्लॉक के खिलाफ धरमजयगढ़ में संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज और तेज होने के संकेत हैं।

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