जोहार छत्तीसगढ़ – रायगढ़।
रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया द्वारा धरमजयगढ़ क्षेत्र में सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने की चर्चा इन दिनों राजनीतिक गलियारों से लेकर चौक-चौराहों और चाय-ठेला गुमटियों तक जोर-शोर से सुनाई दे रही है। प्रतिनिधि पद को लेकर संभावित दावेदारों के बीच अंदरखाने सक्रियता बढ़ने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि कई लोग इस पद की दौड़ में शामिल होने के लिए अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर चुके हैं।धरमजयगढ़ में सांसद प्रतिनिधि का पद केवल एक औपचारिक जिम्मेदारी नहीं माना जाता। सांसद की ओर से क्षेत्र में शासन-प्रशासन के साथ समन्वय, जनसमस्याओं को सांसद तक पहुंचाने और विकास कार्यों की जानकारी रखने जैसी महत्वपूर्ण भूमिका प्रतिनिधि को निभानी पड़ सकती है। ऐसे में इस पद को लेकर राजनीतिक रुचि बढ़ना स्वाभाविक है।
किसके सिर सजेगा प्रतिनिधि का ताज?
चर्चा है कि सांसद प्रतिनिधि बनने के लिए कई संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर संपर्क साध रहे हैं। कोई संगठन के वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से पैरवी कराने में जुटा है तो कोई अपने राजनीतिक संबंधों के जरिए सांसद तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिनिधि की नियुक्ति कब और किसे की जाएगी। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर भाजपा के अंदर भी अलग-अलग दावेदारों के बीच खींचतान की स्थिति बन सकती है। यदि कई लोग इस पद के लिए मजबूत दावेदारी करते हैं तो अंतिम निर्णय सांसद के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गुटबाजी से ऊपर संगठन हित को प्राथमिकता देने की चुनौती
सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि चयन किस आधार पर होगा। क्या प्रतिनिधि का चयन व्यक्तिगत नजदीकियों और गुटीय समीकरणों के आधार पर होगा या फिर संगठन के प्रति सक्रियता, जनाधार, कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता और क्षेत्र की समस्याओं की समझ को प्राथमिकता दी जाएगी? धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर समय-समय पर संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाली मानी जा रही है।
आने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा फैसला
राजनीतिक हलकों में सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सांसद द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि क्षेत्र में पार्टी और सांसद के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकता है। इसलिए यदि नियुक्ति सही व्यक्ति की होती है तो इसका लाभ संगठन को लंबे समय तक मिल सकता है।वहीं, यदि नियुक्ति केवल किसी एक गुट को संतुष्ट करने या राजनीतिक दबाव के आधार पर होती है और दूसरे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है, तो इसका असर संगठन के अंदर दिखाई देने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक आकलन है और नियुक्ति के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
दावेदारों की सक्रियता ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
फिलहाल सांसद प्रतिनिधि पद को लेकर धरमजयगढ़ में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। संभावित दावेदारों की सक्रियता और नेताओं के यहां बढ़ती आवाजाही को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि सांसद राधेश्याम राठिया आखिर किस चेहरे पर भरोसा जताते हैं। अब निगाहें सांसद के फैसले पर टिकी हैं। प्रतिनिधि के रूप में ऐसा चेहरा सामने आता है जो सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चले और क्षेत्र की जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे, तो यह नियुक्ति सांसद के साथ-साथ भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दूसरी ओर, यदि फैसला गुटीय राजनीति के प्रभाव में हुआ तो आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक परिणामों को लेकर चर्चाएं और तेज होना तय माना जा रहा है।








