जोहार छत्तीसगढ़-कुसमी।
बलरामपुर जिले के आदिवासी विकासखंड कुसमी अंतर्गत धनेशपुर ग्राम पंचायत और आसपास के पहाड़ी कोरवा बाहुल्य गांवों में सड़क और पुल-पुलिया की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। धनेशपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर जहाज पत्थल के पास बनी पुलिया पिछले करीब पांच वर्षों से क्षतिग्रस्त हालत में पड़ी है, लेकिन अब तक इसके निर्माण या मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या की जानकारी जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों तक कई बार पहुंचने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बरसात में पूरी तरह टूट जाता है संपर्क
धनेशपुर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पहले से ही दुर्गम है। यहां बड़ी संख्या में पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोग निवास करते हैं। क्षेत्र के कई गांवों तक पहुंचने के लिए धनेशपुर मार्ग ही प्रमुख और लगभग एकमात्र सड़क है। सड़क का बड़ा हिस्सा खराब हो चुका है और कई स्थानों पर पुल-पुलिया भी जर्जर अवस्था में हैं। बारिश शुरू होते ही नदी-नालों का जलस्तर बढ़ जाता है और क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद ही ग्रामीण किसी तरह आवागमन शुरू कर पाते हैं। ऐसे में बरसात के पूरे मौसम में ग्रामीणों को अपने दैनिक जीवन से जुड़ी जरूरी जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
राशन लेने के लिए भी उठानी पड़ती है परेशानी
आसनपानी गांव के ग्रामीण सोमारू कोरवा ने बताया कि बारिश के दिनों में राशन और चावल लेने के लिए ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नदी में बाढ़ आने पर रास्ता बंद हो जाता है और कई बार ग्रामीणों को रात दूसरे गांव में ही आसरा लेकर गुजारनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल की खराब स्थिति का सबसे अधिक असर गरीब और आदिवासी परिवारों पर पड़ता है। जरूरी सामान, राशन, इलाज और अन्य कार्यों के लिए उन्हें जोखिम उठाकर नदी-नालों को पार करना पड़ता है।
बाढ़ के कारण शिक्षक भी लौटने को मजबूर
धनेशपुर क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए भी बरसात का मौसम बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी में बाढ़ आने के कारण कई बार शिक्षक रास्ते से ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। सबसे गंभीर स्थिति उस समय पैदा होती है जब किसी ग्रामीण को अचानक चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बाढ़ और खराब सड़क के कारण एंबुलेंस तक गांवों में पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आपातकालीन स्थिति में मरीज को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
प्रधानमंत्री सड़क योजना से जुड़ा है मार्ग
ग्रामीणों के अनुसार जहाज़ पत्थल के पास स्थित क्षतिग्रस्त पुलिया प्रधानमंत्री सड़क योजना से जुड़े मार्ग का हिस्सा है। इसके बावजूद वर्षों से पुलिया का निर्माण नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब यह मार्ग कई ग्राम पंचायतों और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों को जोड़ता है तो इसकी स्थिति सुधारने के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम होना चाहिए। ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क क्षेत्र के कई गांवों के लिए जीवनरेखा है, तो फिर पांच वर्षों से क्षतिग्रस्त पुलिया की सुध आखिर क्यों नहीं ली जा रही है।
धनेशपुर हाट बाजार के आगे दूसरा पुल भी जर्जर
समस्या केवल जहाज पत्थल तक सीमित नहीं है। धनेशपुर हाट बाजार से आगे पडि़पा चौक के पास बना पुल भी लंबे समय से जर्जर हालत में है। यहां कई वर्षों से जंग खाता चेतावनी बोर्ड आज भी देखा जा सकता है, जिस पर पुल की जर्जर स्थिति के कारण भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध की सूचना अंकित है। ग्रामीणों का कहना है कि चेतावनी बोर्ड तो वर्षों से लगा हुआ है, लेकिन पुल के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर ग्रामीणों को जोखिम के बीच आवागमन करने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
बारिश में विकासखंड से कट जाता संपर्क

ग्रामीणों के मुताबिक धनेशपुर क्षेत्र की समस्या सामान्य सड़क खराब होने से कहीं ज्यादा गंभीर है। बरसात के मौसम में बारिश और नदी-नालों में बाढ़ के कारण विकासखंड मुख्यालय से कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। जरूरी सेवाओं और प्रशासनिक सुविधाओं तक ग्रामीणों की पहुंच मुश्किल हो जाती है। ग्रामीण अब इस क्षेत्र की स्थिति की तुलना बलरामपुर जिले के एक ऐसे दुर्गम इलाके से करने लगे हैं, जहां बारिश के दौरान बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब विकास और बेहतर सड़क संपर्क की बात की जाती है, तब धनेशपुर क्षेत्र का वर्षों तक ऐसी मूलभूत समस्या से जूझना चिंता का विषय है।
अधिकारियों के दौरे के बावजूद समस्या जस की तस

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात का मौसम खत्म होने के बाद कभी-कभार अधिकारी इन इलाकों का दौरा करते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाता। निरीक्षण और आश्वासन के बाद भी क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते पुलिया का निर्माण कर दिया जाता तो हर साल बरसात में पैदा होने वाली परेशानी से हजारों लोगों को राहत मिल सकती थी।
विधायक, सांसद और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
धनेशपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने समाचार के माध्यम से क्षेत्रीय विधायक, सांसद एवं बलरामपुर कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। ग्रामीणों ने जहाज़ पत्थल के पास क्षतिग्रस्त पुलिया का जल्द से जल्द निर्माण कराने के साथ-साथ धनेशपुर मार्ग की पूरी सड़क और पडि़पा चौक के पास जर्जर पुल की भी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ मुद्दा है। प्रशासन यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाता है तो बरसात में गांवों के संपर्क टूटने की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। अब देखना यह है कि वर्षों से बदहाल इस मार्ग और पुलिया की ओर जिम्मेदारों की नजर कब पड़ती है और धनेशपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को इस समस्या से स्थायी राहत कब मिलती है।
कार्यपालन अभियंता प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना – इस पूरे क्षेत्र में हमारी नजर बनी हुई है जहां-जहां पर पुलिया टूटे हुए हैं और जहां पर उच्च स्तरीय पुल की निर्माण की आवश्यकता है उन स्थलों पर मेरे द्वारा स्वयं जाकर स्थल का निरीक्षण कर प्रपोजल उच्च अधिकारियों को संज्ञान में देते हुए नियमानुसार भेज दिया गया है जैसे ही निर्माण कार्य हेतु शासन से स्वीकृति आता है कार्य गुणवत्ता युक्त प्राथमिकता के साथ प्रारंभ कर दिया जाएगा।








