जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में राजस्व भूमि को लेकर सामने आया एक मामला व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि एक गरीब भूमिस्वामी की राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जमीन का सीमांकन होने के बाद जब उसने अपनी भूमि पर खेती शुरू की, तो दबंगई के दम पर उसकी खड़ी फसल को मशीन से रौंधकर दोबारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। पीडि़त का आरोप है कि अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाने के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला और पुलिस की मौजूदगी में भी उसकी फसल चौपट कर दी गई। मामला पटवारी हल्का क्रमांक 36 से जुड़ा बताया जा रहा है। बायसी निवासी विनय सरकार पिता रतिकान्त सरकार के नाम राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम बायसी की खसरा नंबर 575/3, रकबा 0.165 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। पीडि़त के अनुसार धरमजयगढ़ निवासी अब्दुल नवाब पिता हाजी अब्दुल नवाब द्वारा उक्त भूमि के एक हिस्से में सीपीटी गड्ढा खोदकर कब्जा किया गया था।
सीमांकन में सामने आया कब्जे का उल्लेख
भूमि विवाद को लेकर विनय सरकार ने विधिवत सीमांकन कराया। 19 मार्च 2025 को राजस्व निरीक्षक द्वारा तहसीलदार धरमजयगढ़ को प्रस्तुत सीमांकन प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि तहसीलदार के आदेश के बाद मौके पर आवेदक, सरपंच, सीमावर्ती भूमिस्वामी एवं ग्रामवासियों की मौजूदगी में भूमि का सीमांकन किया गया और चारों सीमाओं को चिन्हांकित कर बताया गया। प्रतिवेदन में यह भी उल्लेखित है कि संबंधित प्लॉट के करीब 342 वर्गमीटर क्षेत्र में सीपीटी गड्ढा खोदकर अब्दुल नवाब द्वारा कब्जा किया गया था। सीमांकन के बाद भूमि मालिक ने राजस्व निरीक्षक और पटवारी द्वारा बताई गई जमीन पर खेती-किसानी शुरू कर दी। लेकिन आरोप है कि खेती शुरू होने के बाद विवाद फिर गहरा गया।

खड़ी फसल को मशीन से रौंधने का आरोप
पीडि़त पक्ष का आरोप है कि उसकी मेहनत से तैयार की गई फसल को मशीन लगाकर रौंध दिया गया और जमीन पर पुन: कब्जा करने का प्रयास किया गया। पीडि़त का कहना है कि उसने मामले की शिकायत लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उसे राहत नहीं मिली।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस की मौजूदगी में भी फसल को नुकसान पहुंचाया गया। यदि पीडि़त के आरोप सही हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जमीन, सीमांकन प्रतिवेदन और मौके की स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद आखिर गरीब भूमिस्वामी की फसल को सुरक्षा क्यों नहीं मिल सकी?
क्या कानून गरीब और रसूखदार के लिए अलग-अलग?
इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीणों के बीच भी नाराजगी पैदा कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड है तथा भूमि का सरकारी स्तर पर सीमांकन भी हो चुका है, तो फिर उसे अपनी ही जमीन पर खेती करने के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? लोगों का सवाल है कि क्या कानून का पालन सिर्फ गरीब और कमजोर लोगों के लिए है? क्या रसूखदारों के सामने नियम-कायदे बेअसर हो जाते हैं? हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पक्ष का बयान और प्रशासन-पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन प्रतिवेदन और फसल नुकसान के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पीडि़त भूमिस्वामी को न्याय दिलाता है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबकर रह जाता है।








