जोहार छत्तीसगढ़ — लैलूंगा।
लैलूंगा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही मोबाइल नेटवर्क की समस्या अब एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्र में नेटवर्क की बदहाल स्थिति, मोबाइल टावरों के संचालन और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को लेकर पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने 23 अगस्त को अपने निवास पर ग्रामीणों की बैठक बुलाने की बात कही है। बताया जा रहा है कि बैठक में नेटवर्क की समस्या को लेकर आगे आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। रवि भगत ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि मोबाइल टावरों में बिजली गुल होने की स्थिति में इस्तेमाल होने वाले जनरेटर के डीजल की कथित तौर पर चोरी कर उसे बेच दिया जाता है। उनका आरोप है कि पर्याप्त ईंधन नहीं होने के कारण बिजली बंद होने पर कई स्थानों के मोबाइल टावर बंद हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई टावरों की रेंज कम कर दी जाती है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो जाता है। इन तमाम समस्याओं को लेकर रवि भगत ने ग्रामीणों से 23 अगस्त को अपने निवास पर पहुंचने की अपील की है। बैठक में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी और इसके बाद संबंधित विभागों तथा मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
भाजपा छोड़ने के बाद आंदोलन को लेकर उठने लगे सवाल
वहीं रवि भगत द्वारा नेटवर्क समस्या को लेकर आंदोलन की तैयारी किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ क्षेत्र में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या लैलूंगा में मोबाइल नेटवर्क की समस्या भाजपा से इस्तीफा देने के बाद ही शुरू हुई है? लोगों का कहना है कि लैलूंगा के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की परेशानी कोई नई समस्या नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से कमजोर नेटवर्क, कॉल ड्रॉप, इंटरनेट की धीमी गति और कई स्थानों पर नेटवर्क पूरी तरह गायब रहने जैसी समस्याओं का सामना करते आ रहे हैं। ऐसे में अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब रवि भगत भाजपा में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर रहे, तब उन्होंने इस समस्या को लेकर आंदोलन क्यों नहीं किया? लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि नेटवर्क की समस्या पहले से मौजूद थी तो भाजपा में रहते हुए इस मुद्दे को प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया गया?
ग्रामीणों की परेशानी पर राजनीति या गंभीर पहल?
हालांकि, नेटवर्क की समस्या को लेकर आंदोलन की घोषणा के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 23 अगस्त की बैठक में कितने ग्रामीण शामिल होते हैं और बैठक के बाद आंदोलन को किस दिशा में ले जाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। लैलूंगा के कई ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क आज भी लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्य, डिजिटल भुगतान, आपातकालीन सेवाओं और परिजनों से संपर्क के लिए मोबाइल नेटवर्क पर ग्रामीणों की निर्भरता लगातार बढ़ी है। ऐसे में नेटवर्क की समस्या का समाधान ग्रामीणों के लिए बेहद जरूरी है। अब सबकी नजर 23 अगस्त को होने वाली बैठक पर टिकी है। बैठक में ग्रामीण किस तरह की समस्याएं सामने रखते हैं और रवि भगत इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की क्या रणनीति तैयार करते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं, भाजपा में रहते हुए इस मुद्दे को नहीं उठाने को लेकर उठ रहे सवालों का रवि भगत क्या जवाब देते हैं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।








