जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ वन मंडल में जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाकारुमा वन परिक्षेत्र के सजापाली और चिरौडीह के बीच बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई कर जमीन को साफ किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि यहां सैकड़ों एकड़ वन क्षेत्र को धीरे-धीरे साफ कर कब्जे की तैयारी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में कुछ पंडो परिवार जंगल के बीच निवास कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन परिवारों की आड़ लेकर बाहरी तत्वों द्वारा बड़े भू-भाग में पेड़ों की कटाई कर जंगल को साफ किया जा रहा है। जिस क्षेत्र में यह गतिविधियां चल रही हैं, वहां बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात सामने आ रही है।
कई दिनों तक चलती रही कटाई, फिर भी विभाग बेखबर?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वन क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ जमीन को साफ किया गया है तो यह काम एक-दो दिन में संभव नहीं है। पेड़ों की कटाई, लकड़ी हटाने और जमीन को साफ करने में लंबा समय लगा होगा। इसके बावजूद संबंधित बीट गार्ड और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी जानकारी नहीं होना वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
वन क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित गश्त और निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती तो इतने बड़े क्षेत्र में जंगल साफ करने की स्थिति नहीं बनती।
संरक्षण के दावों के बीच जंगल साफ होने का आरोप
सरकार द्वारा वन संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। दूसरी ओर यदि धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकारुमा रेंज में बड़े पैमाने पर जंगल साफ किया जा रहा है तो यह वन संरक्षण की जमीनी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, मौके का सीमांकन और काटे गए पेड़ों का आकलन कराने की मांग की है। साथ ही यह भी जांच करने की मांग उठ रही है कि साफ किए गए क्षेत्र में कितने पेड़ काटे गए और वहां किस उद्देश्य से जमीन को खाली किया जा रहा है।
मिलीभगत की आशंका की भी हो जांच
इतने बड़े क्षेत्र में कथित जंगल कटाई की जानकारी वन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों तक नहीं पहुंचना अपने आप में जांच का विषय है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप अभी जांच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
जरूरत इस बात की है कि वरिष्ठ वन अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करें और यह स्पष्ट करें कि वन भूमि पर कितनी जमीन साफ हुई है, कितने पेड़ काटे गए हैं तथा इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
यदि जांच में अवैध कटाई और वन भूमि पर कब्जे की कोशिश की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।








