छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय पर्व की तैयारी में परंपरा टूटी, गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया बैठक में

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त को लेकर जहां पूरे देश में देशभक्ति और उत्साह का माहौल है, वहीं धरमजयगढ़ में इस बार स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय पर्व को बेहतर और गरिमामय तरीके से मनाने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा नगर के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा पत्रकारों के साथ बैठक आयोजित कर सुझाव लिए जाते थे। लेकिन इस वर्ष इस परंपरा को ही समाप्त कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर स्थानीय प्रशासन ने नगर के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और पत्रकारों को बैठक में शामिल करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही बैठक कर तैयारियों और कार्यक्रमों से संबंधित निर्णय लिए हैं। इससे नगर में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वर्षों से चली आ रही परंपरा पर उठे सवाल
राष्ट्रीय पर्व केवल प्रशासन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे नगर और समाज का उत्सव होता है। ऐसे आयोजनों की तैयारियों में जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों और विभिन्न वर्गों के लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम को और बेहतर बनाने के सुझाव मिलते रहे हैं।
हर वर्ष बैठक में नगर की व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, यातायात व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था सहित राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण तरीके से मनाने को लेकर चर्चा होती थी। लेकिन इस बार बाहरी तौर पर ऐसा कोई व्यापक विचार-विमर्श नजर नहीं आया, जिससे लोगों के बीच प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
क्रिकेट मैच को लेकर भी असमंजस
15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर धरमजयगढ़ में अधिकारी-कर्मचारियों और पत्रकारों के बीच सद्भावना क्रिकेट मैच आयोजित किए जाने की परंपरा भी रही है। यह मैच महज खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि प्रशासन, पत्रकारों और समाज के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश देने वाला आयोजन माना जाता रहा है।
लेकिन इस बार 15 अगस्त को लेकर अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अधिकारी-कर्मचारी और पत्रकारों के बीच सद्भावना क्रिकेट मैच आयोजित किया जाएगा या नहीं। आयोजन होगा या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं होने के कारण पत्रकारों और नगरवासियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आखिर प्रशासन ने क्यों बदली व्यवस्था?
नगरवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्थानीय प्रशासन को ऐसी क्या आवश्यकता महसूस हुई कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को इस बार बदल दिया गया? क्या राष्ट्रीय पर्व की तैयारियों में जनप्रतिनिधियों और नगर के गणमान्य नागरिकों की सहभागिता अब जरूरी नहीं समझी जा रही है? या फिर प्रशासन ने कार्यक्रम को अपने स्तर पर ही संचालित करने का निर्णय लिया है?
लोगों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। राष्ट्रीय पर्व जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर सभी वर्गों की सहभागिता से आयोजन की गरिमा और बढ़ती है। ऐसे में परंपरा को अचानक समाप्त करने के पीछे क्या कारण है, इसे लेकर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पारदर्शिता और सहभागिता की मांग
नगरवासियों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस किसी एक विभाग या अधिकारी का कार्यक्रम नहीं है। यह पूरे देश और समाज के गौरव का पर्व है। इसलिए इसकी तैयारियों में नगर के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए। बैठक में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों और पत्रकारों को शामिल करने से न केवल बेहतर सुझाव मिलते हैं, बल्कि आम लोगों में भी राष्ट्रीय पर्व को लेकर उत्साह और सहभागिता बढ़ती है।
अब देखने वाली बात होगी कि 15 अगस्त के आयोजन में प्रशासन पुरानी परंपराओं को कायम रखता है या इस बार नई व्यवस्था के तहत ही कार्यक्रम संपन्न कराया जाता है। फिलहाल बैठक में जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों को नहीं बुलाए जाने तथा सद्भावना क्रिकेट मैच को लेकर बनी अनिश्चितता नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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