छत्तीसगढ़

बीच सड़क पाइप ऊंची-नीची सड़कें और खुले गड्ढे क्या..किसी के जिंदगी की तबाह होने का इंतजार कर रही नगर पालिका ?, पहले सुरक्षा चूक ने एक अधिवक्ता को व्हीलचेयर पर ला दिया, अब पूरे शहर में अव्यवस्थित निर्माण से हर दिन हादसे का खतरा

जोहार छत्तीसगढ़-पंडरिया।
नगर पालिका पंडरिया में विकास कार्यों की हकीकत अब शहरवासियों की सुरक्षा पर सवाल बनकर खड़ी हो गई है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई जा रही सड़कों पर न तो तकनीकी मानकों का पालन दिखाई दे रहा है और न ही आम नागरिकों की सुरक्षा की चिंता शहर के अनेक वार्डों में पीस वर्क के नाम पर 20 से 50 मीटर तक सीसी सड़क बनाकर शेष सड़क को पुराने स्तर पर छोड़ दिया गया है। नतीजा यह है कि कहीं सड़क अचानक ऊंची हो गई है, कहीं गहरे उतार बन गए हैं और कई जगह सड़क के बीचों-बीच पानी की पाइप लाइन उभरी हुई छोड़ दी गई है। निर्माण के बाद बने गड्ढे स्थिति को और खतरनाक बना रहे हैं। मौके की तस्वीरें इस अव्यवस्था की गवाही दे रही हैं। सड़क समतल नहीं है, पाइप सड़क के बीच निकला हुआ है और दोनों ओर गड्ढे नुमा स्थिति बनी हुई है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और पैदल राहगीर हर दिन दुर्घटना का जोखिम उठाकर गुजरने को मजबूर हैं।

एक हादसे से नहीं जागा प्रशासन

शहरवासियों का कहना है कि नगर पालिका पहले भी निर्माण संबंधी गंभीर लापरवाही का दंश शहर को दे चुकी है। बांधा तालाब के पास बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध के बनाए गए रपटे पर हुई दुर्घटना में एक होनहार युवा अधिवक्ता, जो अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था, गंभीर रूप से घायल हुआ। वह आज स्थायी रूप से व्हीलचेयर पर जीवन बिताने को मजबूर है। अब विडंबना यह है कि नगर पालिका द्वारा सड़क के बीच छोड़ी गई पाइप लाइन और ऊंची-नीची सड़क के कारण उसी अधिवक्ता के लिए व्हीलचेयर से इस मार्ग से गुजरना भी कठिन हो गया है। सवाल यह है कि क्या एक दर्दनाक हादसे से भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई सीख नहीं ली?

विकास या दुर्घटनाओं का इंतजाम

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के बाद सड़क के बीच पाइप बाहर दिखाई दे, सड़क का स्तर असमान हो और गड्ढे खुले छोड़ दिए जाएं, तो यह विकास नहीं बल्कि भविष्य की दुर्घटनाओं की पटकथा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे निर्माण कार्यों का माप-तौल और गुणवत्ता परीक्षण किसने किया, क्या नगर पालिका के इंजीनियरों ने स्थल निरीक्षण किया था, यदि किया, तो ऐसी सड़क को उपयोग के लिए कैसे अनुमति दी गई।

राहगीर खतरे में

इन सड़कों से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, मरीज, साइकिल और मोटरसाइकिल चालक, कोई भी इस खतरे से अछूता नहीं है। बारिश में जब सड़क पर पानी भरता है, तब सड़क के बीच निकली पाइप और ऊंच-नीच दिखाई भी नहीं देती, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।

जवाबदेही तय होगी या फिर किसी हादसे का इंतजार

शहरवासियों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर और नगरीय प्रशासन विभाग से मांग की है कि पूरे शहर में हुए ऐसे निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी, लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित इंजीनियर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), ठेकेदार तथा कार्य का निरीक्षण और भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि सड़क के बीच निकले पाइप, ऊंची-नीची सड़क और खुले गड्ढों के कारण भविष्य में किसी भी नागरिक के साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी नगर पालिका पंडरिया के जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।

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