छत्तीसगढ़

चार दशक की सेवायात्रा को मिला भावपूर्ण सम्मान, प्रधानपाठक मनहरण दास मानिकपुरी को दी गई भावभीनी विदाई

जोहार छत्तीसगढ़-कवर्धा।

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेन्हाभाठा में आयोजित सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह एक शिक्षक की औपचारिक विदाई से कहीं बढ़कर चार दशक की समर्पित शैक्षणिक यात्रा को नमन करने का भावुक अवसर बन गया विद्यालय के प्रधानपाठक मनहरण दास मानिकपुरी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, ग्रामीणों एवं परिजनों ने आत्मीयता के साथ उनका अभिनंदन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद किया। करीब चार दशकों तक शिक्षा की अलख जगाने वाले मनहरण दास ने अपने सफल सेवाकाल की पारी पूर्ण कर सेवानिवृत्ति ग्रहण की समारोह के दौरान अतिथियों ने उनके चार दशक लंबे शैक्षणिक योगदान, अनुशासित कार्यशैली और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण को रेखांकित करते हुए उन्हें शिक्षा जगत की प्रेरणादायी हस्ती बताया उनका कहना था कि उन्होंने शिक्षण को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त माध्यम बनाया। मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर ने कहा कि मनहरण दास ने पूरे सेवाकाल में ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की वहीं सेवानिवृत्त व्याख्याता आर.के. महरा ने कहा कि एक शिक्षक सेवा से भले ही निवृत्त हो जाए, लेकिन उसके दिए संस्कार, मूल्य और शिक्षाएं पीढिय़ों तक समाज का मार्गदर्शन करती रहती हैं। अपने भावुक संबोधन में मनहरण दास ने सेवाकाल के दौरान मिले सहयोग और स्नेह के लिए सभी का आभार व्यक्त किया उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि यदि उनके किसी व्यवहार या निर्णय से किसी को ठेस पहुंची हो तो वे उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। इस अवसर पर अतिथियों ने उन्हें शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न एवं पुष्पहार भेंट कर सम्मानित किया समारोह में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक- शिक्षिकाएं, जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, ग्रामीण तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं से ओत-प्रोत इस आयोजन ने एक समर्पित शिक्षक की चार दशक लंबी सेवा यात्रा को यादगार बना दिया कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि एक शिक्षक का कार्यकाल भले समाप्त हो जाए, लेकिन उसके दिए संस्कार, शिक्षा और प्रेरणा कभी सेवानिवृत्त नहीं होते मनहरण दास मानिकपुरी की विदाई भी इसी प्रेरक संदेश के साथ संपन्न हुई, जिसे आने वाली पीढिय़ां लंबे समय तक याद रखेंगी।

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